शपथ खाने योग्य वस्तु है , खाया जाता है थाली में , कटोरा में , पत्तल में या फिर तलहथी में ???? शपथ अदृश्य है […]
Category: संपादकीय
विश्व के राजनेता ठगों के गिरोह –शैलेश कुमार
भ्रष्टाचार विश्वव्यापी शब्द है इससे सिर्फ भारत ही नहीं विश्व पीड़ित है। लोकतान्त्रिक और राष्ट्रीय अध्यक्ष शासन प्रणाली के चुनाव में भ्रष्ट शब्द का स्लोगन […]
क्या विश्व महाविनाश के लिए तैयार है —- डाँ नीलम महेंद्र
अमेरीकी विरोध के बावजूद उत्तर कोरिया द्वारा लगातार किए जा रहे हायड्रोजन बम परीक्षण के परिणाम स्वरूप ट्रम्प और किम जोंग उन की जुबानी जंग […]
वे कौन लोग हैं जो बदलाव से बेहालेतंग हैं — — शैलेश कुमार
—–93 % भारतीय भ्रष्टाचार भारत मुक्ति के अभियान से कोसों दूर। —उद्योगपतियों से लेकर सरकारी अधिकारियो से फिक्स कमीशन बंद। —विगत वर्षों से लूट की […]
विश्व बैंक की रिपोर्ट सरकार के लिए एक ठंडी हवा — डाँ नीलम महेंद्र
विश्व बैंक रिपोर्ट एक ठंडी हवा का झोंका बनकर आई है जब नोटबंदी और जीएसटी को देश की घटती जीडीपी और सुस्त होती अर्थव्यवस्था का […]
साजिशों की महफ़िल में बेबकूफो की कमी–शैलेश कुमार
सवाल ये नहीं की ताजमहल किस सम्प्रदाय से है, सवाल है की अब ताजमहल की देशहित में देन क्या है। सवाल -इतिहास क्या था ये […]
गुजरात चुनाव -पटेल पर दांव पेंच–शैलेश कुमार
वर्तमान में गुजरात सरकार के पास 49 % (ओबीसी और अनुसूचित जाति और जनजाति) सीट आरक्षित है अब सरकार सिर्फ 1 % ही आरक्षित कर […]
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया लोकतंत्र के लिये घातक-डाँ नीलम महेंद्र
वैसे तो भारत एक लोकतांत्रिक देश है। अगर परिभाषा की बात की जाए तो यहाँ जनता के द्वारा जनता के लिए और जनता का ही […]
किसी को हराना आसान है लेकिन किसी को जीतना काफी मुश्किल है
11 वां राष्ट्रपति 25 जुलाई 2002 – 25 जुलाई 2007 अवुल पाकिर जैनुलबदीन अब्दुल कलाम —तमिल नाडु – जन्म –ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसिडेन्सी , […]
न जयप्रकाश आंदोलन कुछ कर पाया न ही अन्ना आंदोलन–डाँ नीलम महेंद्र
वीआईपी कल्चर खत्म करने के उद्देश्य से जब प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मई 2017 में वाहनों पर से लालबत्ती हटाने सम्बन्धी आदेश जारी किया गया तो […]
