हास्य और अनुराग तुम्हीं थे, तानसेन का राग तुम्हीं थे-कवि चेतन नितिन खरे ,मोहोबा

*कायस्थों के अस्तित्व और स्वाभिमान सूर्य रश्मियाँ जब भी बोझिल हुईं अंधेरी रातों से, सदा मिली है ताकत इनको कागज कलम दवातों से, तुम वंशज […]

दामन पर दाग—आसान नहीं–शिव –राज –का –राज्य-्वापसी—डाँ नीलम महेंद्र

भारतीय जनता पार्टी पहली बार 5 मार्च 1990 में भोजपुर विधायक सुन्दर लाल पटवा के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का कमान 15 मई 1992 तक संभाली […]

सर्वें में गिरावट–राष्ट्रीय मोर्चों पर सरकार असफल क्यों— डॉ नीलम महेंद्र

मार्च 2017 में उप्र के चुनावी नतीजों के बाद देश भर के विभिन्न मीडिया सर्वे में जुलाई तक जिस मोदी को एक ऐसे तूफान का […]

कायस्थ —-नई दिशा और नई सोच–शैलेश कुमार

चित्रगुप्त की उत्पति : – विष्णु के मस्तिष्क से उत्पति पुत्र। विष्णु ने कहा यह पुत्र -कायस्थ के नाम से जाना जाएगा। ******************************************************************** -मस्तिष्क को […]

35-A जैसे दमनकारी कानूनों का बोझ देश क्यों उठाए–डा० नीलम महेंद्र-

डा० नीलम महेंद्र————- भारत का हर नागरिक गर्व से कहता कि कश्मीर हमारा है लेकिन फिर ऐसी क्या बात है कि आज तक हम कश्मीर […]