विजयवाड़ा शिविर : 30 लंबित मामलों की सुनवाई हुई ; करीब 80 लाख रुपये मुआवजे की संस्तुति : राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

विजयवाड़ा शिविर : 30 लंबित मामलों की सुनवाई हुई ; करीब 80 लाख रुपये मुआवजे की संस्तुति  : राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

विजयवाड़ा: ——-  राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, भारत दवारा विजयवाड़ा शिविर बैठक का समापन

बैठक के दौरान 30 लंबित मामलों की सुनवाई हुई ; करीब 80 लाख रुपये मुआवजे की संस्तुति

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने आज 30 लंबित मामलों की सुनवाई के बाद और आंध्र प्रदेश राज्य में मानव अधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को राहत के रूप में लगभग 80 लाख रुपये की सिफारिश करने के बाद अपने एक दिवसीय विजयवाड़ा शिविर का समापन किया। एनएचआरसी के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति श्री अरुण मिश्रा, सदस्य, डॉ. ज्ञानेश्वर एम मुले, श्री राजीव जैन और श्रीमती विजया भारती सयानी ने महासचिव, श्री भरत लाल, रजिस्ट्रार (विधि), सुरजीत डे, वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों एवं शिकायतकर्ताओं की उपस्थिति में मामलों की सुनवाई की।

alt

आयोग ने अलग-अलग मामलों में उचित निर्देश पारित किए जैसे कि मेडिकल छात्रों के लिए छात्रावास में रहने और अत्यधिक फीस का भुगतान करने की कोई बाध्यता नहीं है, वह मामला जहां सरपंच को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा था, 25,000 रुपये का मुआवजा, पेंशन लाभ के विलंबित भुगतान पर ब्याज का भुगतान करने का आदेश तथा दिव्यांगजनों की तत्काल चिकित्सा जांच कर पेंशन में वृद्धि प्रदान करने आदि के लिए 80 लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश की गई और मानव अधिकार उल्लंघन के पीड़ितों के लिए भुगतान प्रक्रिया शुरू की गई है।

alt

आयोग ने 17 मामलों में अंतिम आदेश पारित किये, जिनमें से 05 मामलों को मुआवजे की संस्तुति के बाद बंद कर दिया गया है। आयोग ने राज्य पदाधिकारियों को यौन अपराधों के शिकार बच्चों के मुआवजे के मामलों में पॉक्सोि कोर्ट के समक्ष प्रस्ताव रखने का निर्देश दिया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया गया कि ‘पीड़ित मुआवजा योजना’ के तहत मुआवजे का भुगतान एनएएलएसए द्वारा बनाए गए दिशानिर्देशों के अनुसार हो।

alt

मामलों की सुनवाई के बाद, आयोग ने मानव अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और आंध्र प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। आंध्र प्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने भी राज्य में नागरिकों के मानव अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन हेतु अनुकूल वातावरण का निर्माण करने के उद्देश्य् से बैठक में भाग लिया।

alt

आयोग ने अधिकारियों से मानसिक स्वास्थ्य, बंधुआ मजदूरी, भोजन और सुरक्षा का अधिकार, सीसैम, ट्रक ड्राइवर, नेत्र आघात, न्यायिक और पुलिस हिरासत में आत्महत्या की रोकथाम, हाथ से मैला ढोना आदि मुद्दों पर आयोग द्वारा जारी विभिन्न परामर्शियों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्हें आयोग को समय पर रिपोर्ट प्रस्तुात करने के लिए भी कहा गया ताकि मानव अधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके। इस बात पर भी जोर दिया गया कि आयोग की सिफारिशों पर अनुपालन रिपोर्ट बिना किसी देरी के प्रस्तुत की जाए। मुख्य सचिव ने पूर्ण अनुपालन का आश्वासन दिया।

alt

बाद में, आयोग ने नागरिक समाज, गैर सरकारी संगठनों और मानव अधिकार संरक्षकों के प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा की। उन्होंने मानव अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित कई मुद्दों को उठाया, जैसे श्रवणबाधित और मानसिक रूप से दिव्यां ग व्यक्तियों के लिए शैक्षिक अवसरों की कमी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पढ़ाई के लिए हैदराबाद जाना पड़ता है, मानसिक रूप से दिव्यांाग व्यक्तियों के लिए वाहनों की कमी, बाल गृहों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, दुर्व्याएपार, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए रोजगार के अवसरों की कमी, बांग्लादेशी महिला को वापस न भेजा जाना आदि।

alt

आयोग ने राज्य में गैर सरकारी संगठनों और मानव अधिकार संरक्षकों द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और उन्हें बिना किसी डर या पक्षपात के ऐसा करना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। यह चर्चा इस अवलोकन के साथ समाप्त हुई कि राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के साथ गैर सरकारी संगठनों और मानव अधिकार संरक्षकों की निरंतर साझेदारी देश में मानव अधिकार शासन को मजबूत करने में काफी मदद करेगी। उन्हें यह भी बताया गया कि वे मानव अधिकार उल्लंघन की शिकायत hrcnet.nic.in के माध्यम से ऑनलाइन भी दर्ज कर सकते हैं

इसके बाद आयोग ने मीडिया को शिविर बैठक के निष्क र्ष के संबंध में जानकारी दी।

 

Related post

Leave a Reply