एक गरीब की बेटी को इज्जत लूट लिया जाता है। वह थाने में आता है । दरोगा उसे फटकार कर भगा देता है। वह फिर […]
Category: संपादकीय
मन की बात-2 : सरस्वती धुल में लेटी :- शैलेश कुमार
इस सप्ताह काफी चिठठीयाॅं मिली है। इस चिठठी में पढ़ाई पर ज्यादा सवाल कियें गयें है। अगर गरीब छात्र / छात्राऐं मेधावी हो तो उसे […]
रक्षाबन्धन:- साहित्यिक और पौराणिक प्रासंगिकता :- शैलेश कुमार
रक्षाबन्धन एक हिन्दू त्यौहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी […]
रक्षाबंधन पर विशेषः विश्वास की रक्षा ही रक्षाबंधन :- बरुण कुमार सिंह
भारतीय परम्परा में विश्वास का बंधन ही मूल है। रक्षाबंधन इसी विश्वास का बंधन है। यह पर्व मात्र रक्षा-सूत्र के रूप में राखी बांधकर रक्षा […]
आजादी के बाद भारत और इंडिया की तस्वीर?
बरुण कुमार सिंह————– हम कैसी आजादी और किस आजादी की बात करते हैं। आम-आदमी को तो आजादी का मतलब भी नहीं पता। तथाकथित खास आदमी […]
गुंडों के शरण में समर्पित
गुजरात के ऊना , हरियाणा के मिर्चपुर घटना असम्भव !! निचले तबके में स्वाभिमान जगाने वाले और जातियों के कृतघ्नता से मुक्ति दिलाने वाले मात्र […]
वोट की राजनीति और उत्तरप्रदेश
सबसे पहले कांग्रेस का मुख्यमंत्री उम्मीदवार अयोग्य है । राज बब्बर और न ही शीला दीक्षित को उत्तरप्रदेश के जमीनी हकीकत का पता है ये […]
बिहार में चिलचपट क्यों ? जिम्मेवार तो आप ही हैं :- शैलेश कुमार
आज बिहार में जो कुछ हो रहा है उसके लिए वहां के मतदाता जिम्मे्वार हैं । उसके बाद बिहार के मीडिया, जिसने जमकर महागठबंधन का प्रचार , […]
छछूंदर के सर पर चमेली के तेल :- शैलेश कुमार
मुलायम सिंह यादव , नीतीश कुमार और लालूप्रसाद यादव को ज्योतिवसु से सबक लेनी चाहिए। 15 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद भी प्रधानमंत्री की इच्छा […]
