भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहेब “साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै थोथा दे […]
Category: संपादकीय
राजनीति के पार्श्व खिलाडी— शैलेश कुमार
मतदाताओं ने चुनाव को महंगा किया है . मतदान के समय एक बोरी अनाज,कुछ रुप्ये लेकर एक दिन में एक मिनट के लिये अपना वजूद […]
क्या भंसाली निर्दोष हैं ?———–डॉ नीलम महेंद्र
26 जनवरी 2018, देश का 69 वाँ गणतंत्र दिवस, भारतीय इतिहास में पहली बार दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष समारोह के मुख्य अतिथि के रूप […]
सिर्फ “आम आदमी पार्टी ” ही संविधान के दायरे में क्यों –शैलेश कुमार
छत्तीसगढ़ बीजेपी सरकार 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में बीजेपी के 49 विधायक हैं, 11 संसदीय सचिव के पद पर अभी भी काम कर रहे […]
फैक्ट्री में अग्नि काण्ड क्यों ?–शैलेश कुमार
क्योंकि —जब तक लेबर डिपार्टमेंट को उद्योगपति द्वारा तोहफा भेंट करने की प्रथा जारी रहेगा फैक्टरियों में आग लगती रहेगी। सरकारी महकमा के लिए उद्योगपति […]
राजस्थान–2018 — एक विहंगम दृष्टि— शैलेश कुमार
2017 :– वर्तमान में राजस्थान की आबादी — 75,984,317, सातवां घनी आबादी वाला राज्य। जनसंख्या प्रतिशत लगभग:—– हिंदू .. 90% ,मुस्लिम – 8 %, अनुसूचित […]
आशा की किरण मात्र यही प्रैक्टिशनर —- शैलेश कुमार
आवास , शिक्षा, चिकित्सा ,सुरक्षा ,पलायन और शराब ये किसी भी समाज की मौलिक समस्याएं है. आज तक इन पांच समस्याओं पर सभी सरकारें सफलता […]
क्या यह प्रधानमंत्री पद की गरिमा का अपमान नहीं है—- डाँ नीलम महेंद्र
वर्तमान में चल रहे संसद के शीतकालीन सत्र में भारतीय लोकतंत्र की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा माफी की मांग […]
— तो सच बताओ–शैलेश कुमार
1990 हिंदी दैनिक आज (पटना, बिहार) में वरिष्ठ समीक्षक कुलदीप नैयर का एक वाक्य जो आज भी समीचीन है —कांग्रेस –की चुनावी नीति –दाढ़ी और […]
सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ—- डॉ नीलम महेंद्र
“चिड़ियाँ नाल मैं बाज लड़ावाँ गिदरां नुं मैं शेर बनावाँ सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ” सिखों के दसवें गुरु श्री […]
