क्या ममता हार मान चुकी है? आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली बार चुनावी हिंसा के कारण देश के एक राज्य में चुनाव प्रचार […]
Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
राजनीति का मुख्य उद्देश्य “जनसेवा” या फैमिली कैरियर?— सज्जाद हैदर
इतिहास साक्षी है जब-जब विश्व के किसी भी देश में जनता ने आंदोलन आरम्भ किया और जनहित हेतु आंदोलन आरम्भ हुआ तो उसका मुख्य कारण […]
जदयू का घोषणा पत्र —-मुरली मनोहर श्रीवास्तव
• जदयू ने आखिर क्यों जारी नहीं किया घोषणापत्र ? • राम मंदिर और धारा 370 पर मतभेद के लगाए जा रहे कयास ? • […]
मातृ दिवस पर बधाई —— सुलेखा डोगरा
माँ’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वो अपने आप में एक घर है, पूरा संसार है, जिसमें हम सुख शांति से रहते हैं.इस एक अक्षर […]
क्या विपक्ष बना पाएगा सरकार ? — सज्जाद हैदर
राजनीति एक ऐसा विषय है जिस पर कुछ भी भविषयवाणी करना असंभव है। परन्तु, ऐसा भी नहीं कि मूकदर्शक बनकर देखा जाए और मुँह से […]
‘आखिरी रियासती राजा’ और ‘प्रथम सांसद’ कमल सिंह—– मुरली मनोहर श्रीवास्तव
देश के ‘आखिरी रियासती राजा’ और ‘प्रथम सांसद’ कमल सिंह को लोकतंत्र में आज भी है पूर्ण आस्था ********************* • डुमरांव स्टेट के राजा रहे […]
खोखली राजनीति और जनता का आक्रोश ——— सुरेश हिन्दुस्थानी
भारतीय राजनीति और राजनेताओं के प्रति आम जनता की भड़ास का प्रकट होना निश्चित रुप से यह प्रमाणित करता है कि राजनेताओं के बयानों की […]
शर्मसार होने से बची भारत की कानून व्यवस्था—सज्जाद हैदर
पूरे विश्व के सामने शर्मसार होने से बची भारत की कानून व्यवस्था। वाह रे षड़यंत्रकारी सियासी लोग। ऐसा सियासी षड़यंत्र कभी गंदी गलियों में हुआ […]
माँ भारती के रण बांकुरें आओ सौगंध लो—–सुलेखा डोगरा
माँ भारती के रण बांकुरें आओ सौगंध लो सीमा पे खड़े शत्रु का विदध्वंस तुम करो. सिंह की गर्जना से उसे खदेड़ दो हर पथ्थर […]
क्या है सुन्दरता का मापदण्ड?—– डॉ नीलम महेंद्र
हाल ही में आइआइटी में पढने वाली एक लड़की के आत्महत्या करने की खबर आई कारण कि वो मोटी थी उसे अपने मोटा होना इतना […]
