बंगाल में राजनैतिक प्रतिद्वंदिता या दुश्मनी—— डॉ नीलम महेंद्र

क्या ममता हार मान चुकी है? आज़ाद भारत के इतिहास में शायद पहली बार चुनावी हिंसा के कारण देश के एक राज्य में चुनाव प्रचार […]

राजनीति का मुख्य उद्देश्य “जनसेवा” या फैमिली कैरियर?— सज्जाद हैदर

इतिहास साक्षी है जब-जब विश्व के किसी भी देश में जनता ने आंदोलन आरम्भ किया और जनहित हेतु आंदोलन आरम्भ हुआ तो उसका मुख्य कारण […]

‘आखिरी रियासती राजा’ और ‘प्रथम सांसद’ कमल सिंह—– मुरली मनोहर श्रीवास्तव

देश के ‘आखिरी रियासती राजा’ और ‘प्रथम सांसद’ कमल सिंह को लोकतंत्र में आज भी है पूर्ण आस्था ********************* • डुमरांव स्टेट के राजा रहे […]

खोखली राजनीति और जनता का आक्रोश ——— सुरेश हिन्दुस्थानी

भारतीय राजनीति और राजनेताओं के प्रति आम जनता की भड़ास का प्रकट होना निश्चित रुप से यह प्रमाणित करता है कि राजनेताओं के बयानों की […]

शर्मसार होने से बची भारत की कानून व्यवस्था—सज्जाद हैदर

पूरे विश्व के सामने शर्मसार होने से बची भारत की कानून व्यवस्था। वाह रे षड़यंत्रकारी सियासी लोग। ऐसा सियासी षड़यंत्र कभी गंदी गलियों में हुआ […]