जातिवाद से आजाद होता देश का लोकतंत्र —– डॉ नीलम महेंद्र

2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम कई मायनों में ऐतिहासिक रहे। इस बार के चुनावों की खास बात यह थी कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र […]

बिहार में विपक्ष की रणनीति पर भारी पड़ी एनडीए की ठोस नीति —मुरली मनोहर श्रीवास्तव

बिहार में महागठबंधन को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद तो सूबे में अपना खाता तक नहीं खोल […]

खंजरी की थाप पर झूमने वाले गांव में खंजर निकलने लगे—रामकिशोर दयाराम पंवार रोंढावाला

मेरे गांव ————— कहते है कि भारत गांवो में बसता है, अग्रेंजो ने भारत को गांव का देश कहा है। भारत के गांवो को करीब […]

सिद्धू-कैप्टन घमासान, कांग्रेस में भूचाल का संकेत—– सुरेश हिन्दुस्थानी

राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। लेकिन अभी हाल ही में मतदान बाद के जो सर्वेक्षणों में संकेत मिले हैं […]

पिछले 20 वर्षों से रोजा रखते आ रहे हैं — लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव

रमजान में आपने अक्सर सुना होगा कि मुस्लिम समुदाय के लोग इस पूरे महीने रोजा रखते हैं। लेकिन कई हिंदू भी बड़े प्यार से रोजा […]

भारतीय महिलाओं की राजनीतिक दशा और दिशा… आज भी हाशिए पर – मुरली मनोहर श्रीवास्तव

भारत गांवों का देश है, भारतीय महिलाएं शुरुआती दौर से सम्मान की पात्र रही हैं। मगर समाज में इनके हाशिए पर होने की बात से […]