अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो जिसका शीर्षक था, ” रन लाइक अ गर्ल” अर्थात एक लड़की की तरह दौड़ो, काफी सराहा […]
Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
312 वर्ष पुराने न्यूटन के तीसरे नियम ” अजय शर्मा ” का संशोधन सही
312 वर्ष पुराने न्यूटन के तीसरे नियम में भारतीय द्वारा सुझाया गया संशोधन सही , कुछ प्रयोगों की जरुरत । अमेरिकन एसोसिएसन आॅफ फिजिक्स टीचर्ज […]
यूरोप भ्रमण और रनिंग -सतीश सक्सेना
यूरोप का ट्रिप ढाई महीने का रहा जो कि 25 सितम्बर को पूरा होगा, इस बार जर्मनी से बाहर खूबसूरत प्राग (चेकोस्लोवाकिया या चेकिया) , […]
मातृभाषा से बच्चों की सर्जनात्मक शक्ति का विकास होता है
(केन्द्रीय हिन्दी समिति की 31वीं बैठक 6-09-2018 को माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में उन्हीं के निवास पर संपन्न हुई। ) […]
जर्मनी से स्पेन, भोजन एवं स्वाद -सतीश सक्सेना
जर्मन लोगों को मैंने अक्सर ट्रेन या बस में शाम ६ बजे के आसपास नेपकिन में दबाये सैंडविच खाते देखा है , और वे यह […]
कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा —डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’
कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा कुछ ख़्वाब बुन लेना जीना आसान हो जायेगा दिल की सुनलेना मिज़ाज शादमान हो जायेगा मुद्दत लगती […]
हिन्दी तेरी यही कहानी — बरुण कुमार सिंह
हम भारत के लोग! देववाणी की भाषा ‘संस्कृत’ भूल चुके हैं राष्ट्रभाषा हिन्दी पर राजनीति जारी है इंसाफ की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीमकोर्ट में आज […]
शिक्षक – एक अनोखा किरदार — प्रवीण शर्मा
आचार्य द्रोणाचार्य जी ने कहा था – ‘‘शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद मे खेलते हैं।” *************************************** शिक्षक ईश्वर का दिया […]
शिक्षा-क्षेत्र में रचनात्मक परिवर्तन अपेक्षित
आज ‘शिक्षा’ का अर्थ साक्षरता और सूचनात्मक जानकारियों से समृद्ध होना है और आज की शिक्षा का उद्देश्य किसी शासकीय, अशासकीय कार्यालय का वेतनभोगी अधिकारी-कर्मचारी […]
