एक ताजा अध्ययन के मुताबिक जी20 में शामिल सरकारें अब भी हर साल तेल, गैस और कोयले पर आधे ट्रिलियन से ज्यादा धन खर्च कर […]
Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
ट्रम्प हारे नहीं। पर्यावरण की जीत हुई है
तीन साल पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने जब पैरिस समझौते से हाथ पीछे खींचे थे तब उन्होंने न महज़ एक प्रशासनिक फ़ैसला नहीं लिया था। उन्होंने […]
बाईडेन की जीत, बराक की वापसी !—– सज्जाद हैदर–वरिष्ठ पत्रकार
अमेरिका की राजनीति में तेजी के साथ बदलते हुए समीकरण ने बहुत कुछ शांत शब्दों में संदेश दे दिया जिसे समझने की आवश्यकता है। अमेरिका […]
बिहार कि जनता ने यह साफ कर दिया है की वे विकास चाहते है,ना की जंगलराज! — देवेन्द्र फर्नांडिस
धन्यवाद बिहार! बिहार कि जनता ने यह साफ कर दिया है की वे विकास चाहते है,ना की जंगलराज! हमारे जनप्रिय प्रधानमंत्री मा नरेंद्र मोदी जी […]
मुख्यधारा से अभी भी दूर है पहाड़िया समाज— अमरेन्द्र सुमन
दुमका (झारखंड) संथाल परगना प्रमण्डल के हरित पर्वत मालाओं, घने जंगलों, स्वच्छंद नदी-नालों तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए अंग्रेजों, जमींदार और महाजनों जैसे […]
राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के लिये प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों का मज़बूत होना ज़रूरी — डॉ सीमा जावेद (स्वतंत्र पत्रकार)
नयी दिल्ली : भारत में वायु प्रदूषण के विकराल होते परिणामों के बीच एक ताजा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि इस पर नियंत्रण के […]
सियासत की तस्वीर, मालामाल बनाम फटेहाल ! —सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)
वाह रे सियासत तेरी महिमा न्यारी! आज देश की क्या स्थिति है वह किसी से भी छिपी हुई नहीं है। कोरोना के कारण सुराक्षा हेतु […]
क्या हाथी को फिर नए महावत की तलाश ! — सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)
वाह रे सियासत सब कुछ निजी स्वार्थ और सत्ता सुख पर ही निर्भर हो चला है। अब किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई सिद्धान्त नहीं […]
तुष्टिकरण की राजनीति से मुक्ति की और असम– डॉ नीलम महेंद्र (लेखिका वरिष्ठ स्तंभकार)
असम सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि अगले माह यानी नवंबर में वो राज्य में राज्य संचालित सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स […]
नौकरी बनाम रोजगार,बिहार चुनाव आधार!—सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)
बह चली चुनावी बयार, दिखने लगे सपनों में सत्ता के आसार, शुरू हो गई वायदों की बौछार लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि क्या वास्तव में […]
