हिन्दी के योद्धा : जिनका आज जन्मदिन है-14 **************************************** हिन्दी के प्रचार- प्रसार के नाम पर हिन्दी के तथाकथित विद्वानों को प्रतिवर्ष सैकड़ों पुरस्कार और […]
Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
महबूबा का दर्द! 370 की आड़ में सत्ता की कसक !— सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्र चिंतक)
वाह रे सियासत तेरे रूप हजार। सत्ता की चाहत में राजनेता क्या-क्या नहीं कर गुजरते। सत्ता की चाहत और कुर्सी की लालच में राजनेता सबकुछ […]
हम किसी और के संसार में रहने लगे है …. धर्मपाल की कलम से
भोपाल : —– भारतीय मानस में सृष्टि के विकास के क्रम और उसमें मानवीय प्रयत्न और मानवीय ज्ञान-विज्ञान के स्थान की जो छवि अंकित है, […]
अस्पताल है, मगर डॉक्टर नहीं —- फूलदेव पटेल
मुज़फ़्फ़रपुर —- पूरे देश में सरकारी अस्पताल की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। आये दिन अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली व आरजकता […]
कोरोना काल में क्षत्रिय समाज व आमजन की समस्याओं के निवारण के अग्रदूत
अखिल वैश्विक क्षत्रिय महासभा के राष्टीªय अध्यक्ष व राष्टीªय कार्यकारी अध्यक्ष के जयपुर प्रवास पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजा राघवेन्द्र सिंह राजावत, राष्ट्रीय संगठन महासचिव डॉ॰ […]
‘लाल झंडा’ और लालटेन का भय दिखाने में ‘एनडीए’ कितना कामयाब होगी —- मुरली मनोहर श्रीवास्तव
बिहार की सियासत में कभी धमक रखने वाली या यों कहें की विपक्षी की भूमिका निभाने वाली वामपंथ अपने अस्तित्व को बचाने के लिए जहां […]
बलिया बवाल कई सवाल ! ——-सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)
वाह रे सियासत सत्ता की छांव में सब कुछ संभव है सत्ता की हनक के नीचे बड़े-बड़े अधिकारी मूक-दर्शक मात्र बनकर रह जाते हैं। यह […]
सियासत का सधा हुआ कदमताल! —- सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार )
जी हाँ बिहार की धरती पर चुनावी बिगुल बज चुका है सभी पार्टियों ने अपने-अपने योद्धाओं को चुनावी मैदान में झोंक रखा है। शाब्दिक बाणों […]
एआईओएस — राष्ट्रीय स्तर के वेबिनार का आयोजन
नई दिल्ली: —- भारत में, कमजोर आंखों के बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने के महत्व पर जोर डालते हुए, ऑल इंडिया ऑप्थेल्मोलॉजी सोसाइटी […]
पानी जब ज़हर बन गया —- रब नवाज आलम
साहेबगंज (झारखंड ) दो साल से खाट पर पड़ा हूँ। हाथ-पैर काम नहीं करता। दर्द ऐसा कि सहा तक नहीं जाता। क्या करूँ बाबू, परिवार […]
