भानुप्रतापपुर (छत्तीसगढ़ ) कोरोना महामारी ने देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम जनता की आर्थिक स्थिति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। एक तरफ जहां […]
Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
अत्र कुशलम तत्रास्तु !– प्रेम पाल शर्मा
सबसे पहले बात भाषा की। आवासीय सोसायटी में रहने वाली डॉ मीनाक्षी महाराष्ट्र की है । पिछले 2 वर्ष से बैंगलोर में हैं। बेटी 12वीं […]
पर्यावरण का अलख जगाता किशोर वरद कुबल —- अलका गाडगिल
महाराष्ट्र — वर्तमान में पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति दुनिया भर में एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इसके दुष्प्रभाव से न केवल कई प्रजातियां विलुप्त […]
यूपीएससी—हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों के लिए टेढ़ी खीर प्रो. निरंजन कुमार
भारतीय राज व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में सरकार के अलावा जिन संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, उनमें चुनाव आयोग, उच्चतम न्यायालय […]
* पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जातिगत विभेदों से ऊपर है ‘छठ’ महापर्व* — मुरली मनोहर श्रीवास्तव
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकति जाय… बहंगी लचकति जाय… बात जे पुछेलें बटोहिया बहंगी केकरा के जाय ? बहंगी केकरा के जाय ?….. […]
ओवैसी बनाम बंगाल,बड़ा सियासी भूचाल ! —सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)
राजनीति के क्षेत्र में संविधान के अंतर्गत यह सभी को अधिकार प्राप्त है कि कोई भी राजनेता कहीं से भी चुनाव लड़ सकता है। किसी […]
गोबर के दीयों से मिला रोज़गार —- सूर्यकांत देवांगन
कांकेर (छत्तीसगढ़) में गोधन न्याय योजना शुरू होने के बाद से यहां गोबर का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है, कल तक सिर्फ कण्डे और […]
घर को लगी है आग, घर के “चिराग” से ! — सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)
जी हां बिहार की धरती पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। जोकि राजनीतिक समीकरण में बहुत उथल-पुथल को दर्शाता है। सियासत के सधे […]
देशहित की राजनीति ही होगी पुरस्कृत–डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र
बिहार चुनाव के परिणामों ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि देश की राजनीति राजनेताओं के वोट कबाड़ने वाले हथकंडों से उबरने का प्रयत्न […]
सायकिल से डर नहीं लगता साहब, ट्रैफिक से लगता है!
बात गाड़ियों के धुंए से पर्यावरण बचाने की हो तो सबसे पहला ख्याल साईकिल का आता है। लेकिन साईकिल चलायें भी तो भला कैसे? एक […]
