लेखक के कलम से

मुख्यधारा से अभी भी दूर है पहाड़िया समाज— अमरेन्द्र सुमन

दुमका (झारखंड) संथाल परगना प्रमण्डल के हरित पर्वत मालाओं, घने जंगलों, स्वच्छंद नदी-नालों तथा प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए
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राष्‍ट्रीय वायु गुणवत्‍ता मानकों पर खरा उतरने के लिये प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों का मज़बूत होना

नयी दिल्‍ली : भारत में वायु प्रदूषण के विकराल होते परिणामों के बीच एक ताजा अध्‍ययन में खुलासा हुआ है
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सियासत की तस्वीर, मालामाल बनाम फटेहाल ! —सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)

वाह रे सियासत तेरी महिमा न्यारी! आज देश की क्या स्थिति है वह किसी से भी छिपी हुई नहीं है।
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क्या हाथी को फिर नए महावत की तलाश ! — सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)

वाह रे सियासत सब कुछ निजी स्वार्थ और सत्ता सुख पर ही निर्भर हो चला है। अब किसी भी राजनीतिक
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तुष्टिकरण की राजनीति से मुक्ति की और असम– डॉ नीलम महेंद्र (लेखिका वरिष्ठ स्तंभकार)

असम सरकार ने हाल ही में घोषणा की है कि अगले माह यानी नवंबर में वो राज्य में राज्य संचालित
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नौकरी बनाम रोजगार,बिहार चुनाव आधार!—सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार)

बह चली चुनावी बयार, दिखने लगे सपनों में सत्ता के आसार, शुरू हो गई वायदों की बौछार लेकिन सबसे बड़ा
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राजभाषा के लिए जिन्हें जेल और लाठियाँ मिलीं : श्याम रुद्र पाठक

हिन्दी के योद्धा : जिनका आज जन्मदिन है-14 **************************************** हिन्दी के प्रचार- प्रसार के नाम पर हिन्दी के तथाकथित विद्वानों
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महबूबा का दर्द! 370 की आड़ में सत्ता की कसक !— सज्जाद हैदर (वरिष्ठ पत्रकार

वाह रे सियासत तेरे रूप हजार। सत्ता की चाहत में राजनेता क्या-क्या नहीं कर गुजरते। सत्ता की चाहत और कुर्सी
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हम किसी और के संसार में रहने लगे है …. धर्मपाल की कलम से

भोपाल : —– भारतीय मानस में सृष्टि के विकास के क्रम और उसमें मानवीय प्रयत्न और मानवीय ज्ञान-विज्ञान के स्थान
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अस्पताल है, मगर डॉक्टर नहीं —- फूलदेव पटेल

मुज़फ़्फ़रपुर —- पूरे देश में सरकारी अस्पताल की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। आये दिन अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य
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