दिल दरिया है धड़कती कविताएं लरजता लेखन संसार

पुस्तक समीक्षा संगत चित्र कविताओं के पूरक नहीं कहे जा सकते, क्योंकि प्रत्येक कविता स्वयं चित्रमय है एवं स्वयं ही लक्ष्य को प्राप्त कर रही […]

“आंखों की हिचकियां, अनुभव और अनुभूतियों” और “भारत की 75 वीरांगनाए ” पुस्तक लोकार्पण

हिंदी हमारी मातृभाषा ही नही गर्व की भाषा भी है इसलिए भाषा की समृद्धि में ही हमारी समृद्धि: डा. पुष्पिता अवस्थी नई दिल्ली: इंडिया इंटरनेशनल सेंटर […]

राजेन्द्र अवस्थी की कविताएँ डॉ- शिवशंकर अवस्थी महासचिव, :ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया

मेरे पिताजी डॉ- राजेन्द्र अवस्थी ने अपनी साहित्यिक यात्र का प्रारम्भ एक कवि के रूप में किया था। ये जबलपुर तथा नागपुर के उनके युवा […]

मिल लेखक पेरुमल मुरुगन की पुस्तक ” प्यारे ” की घोषणा 2023 अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

13 दावेदारों में से एक, प्यारे को मूल रूप से तमिल में 2013 में पुकुज़ी के रूप में लिखा गया था और 2016 में अनिरुद्ध […]

माँ, मातृभूमि और मातृभाषा का कोई विकल्प नहीं है – अतुल कोठारी

3 मार्च 2023, को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा पखवाड़ा के समापन और अभिनदंन समारोह माता सुंदरी महिला महाविद्यालय के सभागार में भारतीय भाषा मंच (दिल्ली प्रान्त) और […]

काव्य के विविध रंगों से सजा मधुरंग कवि सम्मेलन

वाराणसी उत्तर प्रदेश:  सन्त अतुलानन्द कॉन्वेन्ट स्कूल, कोइराजपुर, वाराणसी के इन्द्रधनुष सभागर में होली की पूर्व संध्या मधुरंग कवि सम्मेलन के उल्लास से भर उठी । यह सम्मेलन वर्तमान […]

फातिमा शेख  : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला समाज सुधारक ..मुख्तार खान

समाज के विकास और उत्थान में महिलाओं और पुरुषों का समान योगदान रहा है। अक्सर पुरुषों के योगदान की चर्चा होती है, लेकिन महिलाओं द्वारा […]

मासिक धर्म को लेकर भ्रांतियों से भरा है ग्रामीण समाज — रूबी सरकार

भोपाल, मप्र —– प्रति सप्ताह देश की करोड़ों महिलाएं और किशोरियां माहवारी की प्रक्रिया से गुज़रती हैं. हालांकि यह एक प्राकृतिक चक्र है, लेकिन इस […]

बाल विवाह के विरुद्ध जागृत होती किशोरियां —- डॉली गढ़िया

कपकोट, उत्तराखंड ——– जैसे जैसे देश में शिक्षा का प्रसार बढ़ता गया, वैसे वैसे अनेकों सामाजिक बुराइयों का अंत होता चला गया. लेकिन बाल विवाह […]

“आयुष्मान ग्रामीण भारत के वंचित वर्ग वाले 14 वर्ष के दो ऐसे बालकों की कहानी —पटकथाः जैकब वर्गीज़

आयुष्मान फिल्म के निर्देशक जैकब वर्गीज़ ने कहा, “आयुष्मान ग्रामीण भारत के वंचित वर्ग वाले 14 वर्ष के दो ऐसे बालकों की कहानी है, जो […]