मनुष्य की आस्था ही वो शक्ति होती है जो उसे विषम से विषम परिस्थितियों से लड़कर विजयश्री हासिल करने की शक्ति देती है। जब उस […]
Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
वाल्मीकि जयंती शरद पूर्णिमा पर विशेष—- सुरेश हिन्दुस्थानी
समरस समाज : महर्षि वाल्मीकि की संकल्पना *********************************** भारत जब विश्व गुरु के सिंहासन पर आरुढ़ था, उस समय भारतीय चिंतन की अवधारणा पूरे विश्व […]
अपने मौलिक नाम से जाने जाना गौरव का विषय है विवाद का नहीं— डॉ नीलम महेंद्र
बरसों पहले अंग्रेजी के मशहूर लेखक शेक्सपियर ने कहा था, व्हाट इस इन द नेम? यानी नाम में क्या रखा है? अगर गुलाब का नाम […]
शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !—सतीश सक्सेना
मेरी उम्र के लोगों को यह कविता पसंद नहीं आएगी , इसे बेहद दोस्ताना अंदाज़ में लिखा गया है और वे इसके आदी नहीं हैं […]
शिक्षा संस्थानों में आतंकी घुसपैठ — सुरेश हिन्दुस्थानी
भारत में चुनाव से पूर्व वातावरण खराब करने के पर्याप्त संकेत मिल रहे हैं। इसमें पडोसी देश पाकिस्तान और पाकिस्तान परस्त व्यक्तियों के शामिल होने […]
केवल पुरुषों को दोष देने से काम नहीं चलेगा—– डॉ नीलम महेंद्र
पुरानी यादें हमेशा हसीन और खूबसूरत नहीं होती। मी टू कैम्पेन के जरिए आज जब देश में कुछ महिलाएं अपनी जिंदगी के पुराने अनुभव साझा […]
सावधान ! रनिंग सीखने में लापरवाही ,आपकी जान लेने में भी समर्थ है – सतीश सक्सेना
दो दिन पहले इंग्लैंड में हो रहे कार्डिफ हाफ मैराथन की फिनिश लाइन पर पंहुच कर दो नौजवानों को हार्ट अटैक हुआ और वे बच […]
गठबंधन की राह में रोड़ा बनते छोटे दल———- सुरेश हिन्दुस्थानी
देश में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए बनने वाले विपक्षी गठबंधन के प्रयासों में हर बार कोई न कोई राजनीतिक दल दरार […]
क्यों मुद्दा गौण हो जाता है और राजनीति बड़ी ? डा० नीलम महेंद्र
देर आयद दुरुस्त आयद ! सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसलों से-देश का-आम आदमी कुछ बातें सोचने के लिए मजबूर हो गया-है। आईये समझते-हैं कैसे […]
भावांजलि कविता दिवंगत अटल जी को समर्पित
बहादुरगढ़— कलमवीर विचार मंच से जुड़े हरियाणा के अनेक कवियों ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की मासिक पुण्य तिथि पर […]
