बिमार बीएसएनएल को 13,000 करोड़ का लाईफ सेविंग इंजेक्शन

सार्वजनिक क्षेत्र की भारत संचार निगम लि. (बीएसएनएल) पर कर्ज का बोझ काफी होने से उसके परिचालन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए दूरसंचार विभाग इस उपक्रम के लिए 13,000 करोड़ रुपये के राहत पैकेज पर विचार कर रहा है।

इस प्रस्ताव में 6,365 करोड़ रुपये स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पैकेज देने के साथ ही 6,767 करोड़ रुपये के इक्विटी निवेश के माध्यम से 4जी स्पेक्ट्रम आवंटन तथा रियल एस्टेट संपत्तियों की बिक्री शामिल है।

कंपनी के एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, ‘बैंक बीएसएनएल को अब अल्पावधि का ऋण देने से भी परहेज कर रहे हैं। कंपनी को वित्त वर्ष 2019 में करीब 7,000 करोड़ रुपये का घाटा होने का अंदेशा है, जिनमें 4,000 करोड़ रुपये परिचालन घाटा होगा।’

18 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब पैसे की तंगी की वजह से बीएसएनएल पिछले दो महीने से अपने कर्मचारियों के वेतन का भी भुगतान नहीं कर पाई है।

कंपनी पर करीब 13,000 करोड़ रुपये का कर्ज है जबकि दूरसंचार क्षेत्र पर कुल कर्ज करीब 6.1 लाख करोड़ रुपये का है। दूरसंचार विभाग जिस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, उसे डिजिटल संचार आयोग से मंजूरी लेनी होगी।

केंद्र सरकार का मानना है कि दूरसंचार एक रणनीतिक क्षेत्र है जिसमें सार्वजनिक कंपनियों की मौजूदगी जरूर होनी चाहिए।

कर्ज में दबी बीएसएनएल पिछले दो साल से बैंकों से कर्ज हासिल करने में विफल रही है जबकि वह परिचालन खर्चों को पूरा कर रही है। एक अधिकारी ने कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से इस बीमार उपक्रम के पुनरुद्घार का निर्णय जल्द होने की संभावना नहीं है।

डिजिटल संचार आयोग (पूर्व नाम दूरसंचार आयोग) की फरवरी में हुई बैठक में बीएसएनएल और एमटीएनएल दोनों के पुनरुद्घार पैकेज पर चर्चा की गई थी। दोनों कंपनियों ने सरकार को पुनरुद्घार योजना सौंपी थी जिसमें इन कंपनियों को पटरी पर लाने के लिए कुछ उपाय बताए गए थे।

इसमें कहा गया था कि इन कंपनियों के कर्ज को सॉवरिन गारंटी में बदला जा सकता है और, भुगतान में रियायत दी जा सकती है और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की योजना लाई जा सकती है। बीएसएनएल ने देश भर में 7,000 करोड़ रुपये इक्विटी निवेश के माध्यम से 4जी स्पेक्ट्रम की मांग की थी।

एमटीएनएल ने अपने 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज को सॉवरिन गारंटी में बदलने तथा 3जी स्पेक्ट्रम वापस करने की बात कही थी। कंपनी की स्थिति दिनोंदिन खराब होने की वजह से दोनों उपक्रमों ने सरकार से गुहार लगाई कि या तो उनका अधिग्रहण कर लिया जाय या उसे विघटित कर सभी कर्मचारियों को दूरसंचार विभाग में समायोजित किया जाए।

केंद्र सरकार की पुनर्गठन योजना में दो मसलों कर्ज और कर्मचारी पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पैकेज के तहत गुजरात मॉडल पर काम चल रहा है और दूरसंचार विभाग ने प्रस्ताव दिया है कि पैकेज के लिए वित्तपोषण 10 साल के लिए बॉन्ड जारी कर किया जाए जिससे सरकार की लागत कम होगी। एमटीएनएल और बीएसएनएल की संपत्तियां बेची जा सकती हैं।

(बिजनेस स्टैंडर्ड)