प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की समीक्षा

लखनऊ : —–उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पी0एम0 किसान) की जनपद स्तर पर प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि यह योजना लघु एवं सीमान्त किसानों के उत्थान के लिए लागू की जा रही है एवं यह उनके लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में ही राज्य सरकार द्वारा सभी जिलाधिकारियों को इस योजना के तहत आच्छादित होने वाले लघु एवं सीमान्त किसानों को लाभान्वित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए जा चुके हैं।

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों के राजस्व रिकाॅर्ड में दर्ज लघु एवं सीमान्त किसानों की सूची शीघ्र अपलोड करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री जी इस योजना को गोरखपुर से लाॅन्च करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए जनपद स्तर पर पात्र लघु एवं सीमान्त किसानों की एक सूची बनाकर लाभार्थियों के बैंक खातों तथा आधार को सीड करके तैयार कर लिया जाए, ताकि डी0बी0टी0 के माध्यम से उन्हें तत्काल फण्ड ट्रांसफर किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि इस योजना के तहत किसानों को अन्तरित की जाने वाली राशि उनके बचत खातों में भेजी जाए, न कि उनके ऋण खाते में।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 24 फरवरी, 2019 को प्रधानमंत्री जी इस योजना को लागू करेंगे, तब तक इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। लाभार्थियों की सूची बनाने तथा उनके बचत खातों को आधार से सीड करते हुए डी0बी0टी0 के लिए तैयार करने की प्रक्रिया में कृषि विभाग के सभी अधिकारी/कर्मचारी अपना पूरा सहयोग दें। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को अपने नेतृत्व में इस कार्य को पूरा करवाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा मत्स्य पालकों तथा पशु पालकों के लिए भी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी योजनाओं का लाभ भी पात्र लाभार्थियों को दिलवाना सुनिश्चित किया जाए।

ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा 01 फरवरी, 2019 को प्रस्तुत केन्द्रीय बजट में ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ योजना की घोषणा की गयी। इसके अन्तर्गत सभी पात्र लघु एवं सीमान्त कृषक परिवारों को प्रतिवर्ष 6000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खाते में प्रेषित की जाएगी। यह धनराशि 2000 रुपये की तीन समान किश्तों-चार-चार महीने के ब्लाॅक में दी जानी है।

इस योजना को दिनांक 01 दिसम्बर, 2018 से लागू किया गया है, जिसके कारण कृषकों को 2000 रुपये की प्रथम किश्त इसी वित्तीय वर्ष में देय है। यह योजना पूर्णतया केन्द्रीय सहायता पर आधारित है। इस योजना का उद्देश्य लघु एवं सीमांत किसान परिवारों की आय में वृद्धि के लिए सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाना है।

ऐसे लघु एवं सीमांत कृषक परिवार होंगे जिनकी संयुक्त जोत 2 हेक्टेयर से कम हो, योजना के लिए पात्र होंगे। इस योजना के तहत जिन श्रेणियों के लोग पात्र नहीं होंगे उनमें 2 हेक्टेयर से अधिक जमीन वाले किसान परिवार, भूतपूर्व तथा
वर्तमान संवैधानिक पदधारक, भूतपूर्व अथवा वर्तमान मत्रं

ी/राज्य मंत्री या भूतपूर्व मंत्री

या भूतपूर्व/वर्तमान सदस्य लोक सभा/राज्य सभा/राज्य विधान सभा/राज्य विधान परिषद या भूतपूर्व अथवा वर्तमान नगर महापालिका के मेयर या भूतपूर्व अथवा वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष, केन्द्र व राज्य सरकार के कार्यालय/विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी, केन्द्र और राज्य सरकार सहायतित अर्द्धसरकारी संस्थान तथा सरकार से सम्बद्ध समस्त कार्यालय/स्वायत्तशासी संस्थान तथा स्थानीय निकायों के नियमित कार्मिक (चतुर्थ श्रेणी/समूह-घ के कार्मिकांे को छोड़कर), विगत वर्ष में आयकर भुगतान करने वाले, 10 हजार रुपए से अधिक मासिक पेंशन पाने वाले (चतुर्थ श्रेणी/समूह-घ के पेंशनर्स को छोड़कर), पेशेवर डाॅक्टर/इंजीनियर/अधिवक्ता/चार्टर्ड एकाउण्टेन्ट तथा आर्किटेक्ट इत्यादि जो सम्बन्धित पेशे के लिए पंजीकरण करने वाली संस्था में पंजीकृत तथा कार्यरत हैं,
शामिल हैं।

योजनान्तर्गत समस्त कार्य जिलाधिकारी के दिशा निर्देश में किया जाएगा। इस

योजना हेतु मुख्य विकास अधिकारी को नोडल अधिकारी एवं कृषि विभाग को नोडल विभाग नामित किया गया है। राजस्व ग्राम भूलेख अभिलेखों के आधार पर लघु एवं सीमान्त कृषकों का चिन्हीकरण, भूलेख में उपलब्ध जोत व कृषक का विवरण मान्य होगा। कृषि विभाग के पारदर्शी किसान सेवा योजना पोर्टल से राजस्व ग्राम वार लघु
एवं सीमान्त कृषकों की सूची निकाल कर भूलेख से प्राप्त सूची से मिलान कर दो

भागों में सूची तैयार की जाएगी।

भाग-1 में ऐसे कृषक परिवार, जिनके नाम भूलेख अभिलेख एवं पारदर्शी किसान सेवा योजना पोर्टल दोनों में उपलब्ध है। भाग-2 में ऐसे लघु सीमान्त कृषक, जिनके नाम भूलेख में उपलब्ध है, परन्तु पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल पर पंजीकृत नहीं है। किसी भी संस्थान/संस्था की भूमि पर योजना का लाभ देय नहीं है। लाभार्थी कृषक परिवार/सदस्य की पात्रता 01 फरवरी, 2019 को राजस्व अभिलेखों में उपलब्ध भूमि की स्थिति पर निर्धारित होगी तथा आगामी 05 वर्षाें के लिए अपरिवर्तनीय रहेगी। जनपदों में लेखपाल एवं एक ग्राम स्तरीय कार्मिक की दो सदस्यीय टीम गठित कर राजस्व ग्राम वार लघु एवं सीमान्त कृषक परिवारों का
चिन्हीकरण किया जाएगा। राजस्व ग्रामवार सत्यापित लघु सीमान्त कृषक परिवारों का विवरण सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित किया जाएगा।

वीडियो काॅन्फ्रेन्सिंग के दौरान मुख्यमंत्री जी ने निराश्रित गोवंश के रख-रखाव के लिए सभी जनपदों में की जा रही कार्यवाही की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निराश्रित गोवंश के रख-रखाव के लिए सभी जनपदों को धनराशि उपलब्ध करा दी गयी है जिसका सदुपयोग करते हुए इस समस्या का समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंश द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने तथा सड़कों पर ट्रैफिक बाधित करने की शिकायतों को सरकार द्वारा अत्यन्त गम्भीरता से लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि निराश्रित गोवंश के रख-रखाव, चारे-पानी तथा उनकी सुरक्षा की समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जनपदों में ऐसे जर्सी गाय पालकों की सूची बनाने के निर्देश दिए जो बछड़ों को खुला छोड़ देते हैं।

उन्होंने ऐसे गाय पालकों के खिलाफ कार्यवाही करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने अवैध बूचड़खानों की चेकिंग करते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने बागपत तथा सम्भल जनपदों से ऊंटों की तस्करी पर भी सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव डाॅ0 अनूप चन्द्र पाण्डेय, कृषि उत्पादन आयुक्त डाॅ0 प्रभात कुमार, प्रमुख सचिव दुग्ध विकास श्री सुधीर बोबडे, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस0पी0 गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद