पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा ई-जागरूकता अभियान अनूठी पहल —न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.एम.खानविल्कर

चंडीगढ़———– भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.एम.खानविल्कर ने कहा कि प्रौद्योगिकी शीघ्र न्याय के लिए रामबाण नहीं है बल्कि यह केवल एक सुविधाकर्ता है, जिसे न्यायालय प्रबंधन गतिविधि के मूल्यवर्धन के लिए उपयोग किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति ए.एम.खानविल्कर चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी में आयोजित उच्च न्यायालयों की कम्प्यूटर कमेटियों के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन दिवस पर बोल रहे थे। उन्होंने बेहतर न्यायालय प्रबंधन हेतु ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ बढ़ाने के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने का भी प्रस्ताव दिया।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा ई-जागरूकता के प्रसार में की गई अनूठी पहलों पर प्रकाश डालते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री कृष्ण मुरारी ने पैरा-लीगल वालंटियर्स के माध्यम से जमीनी स्तर पर ई-जागरूकता फैलाने में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों की भूमिका का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक अनूठी पहल के रूप में ई-जागरूकता अभियान में विधि विश्वविद्यालयों और विधि महाविद्यालयों को भी जोड़ा है। उनसे विद्यार्थियों के लाभ के लिए अपनी वेबसाइटों पर न्यायालयों की वेबसाइटों के लिंक उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया गया है।

विभिन्न उच्च न्यायालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले माननीय न्यायाधीशों ने अपने-अपने उच्च न्यायालयों में श्रेष्ठ कार्यों और सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन के इस्तेमाल के सम्बंध में भी अपने अनुभव सांझा किये। उन्होंने न्याय प्रदायगी प्रणाली में याचिकाकर्ताओं, वकीलों और अन्य हितधारकों के लाभ के लिए की जा रही नई पहलों और भावी आईटी परियोजनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। इस दौरान सीआईएस 1.0 से सीआईएस 3.0 के माइग्रेशन में विभिन्न उच्च न्यायालयों को पेश आ रही चुनौतियों पर भी चर्चा की गई।

परिचयात्मक सत्र में, भाग लेने वाले न्यायाधीशों ने तकनीकी और प्रबंधन सम्बंधी मुद्दों के समाधान के लिए आईआईटी और आईआईएम से विशेषज्ञों को आमंत्रित करने का सुझाव दिया। इस दौरान, कनेक्टिविटी के लिए ऑप्टिकल फाइबर के उपयोग के स्थान पर उपग्रह प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की व्यवहार्यता पर चर्चा करने के लिए इसरो जैसे सरकारी संगठनों के अधिकारियों को आमंत्रित करने का भी सुझाव दिया गया।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की कम्प्यूटर कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डॉ० रवि रंजन ने अपने समापन सम्बोधन में कहा कि इस सम्मेलन ने ई-कोर्ट्स परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सभी हितधारकों को एक साथ लाने के अपने प्रारम्भिक उद्देश्य को हासिल किया है क्योंकि प्रतिभागियों को भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ई-कमेटी द्वारा किये जा रहे विकास के सम्बंध में बताया गया है। ई-कमेटी को इसके सदस्यों के माध्यम से ई-कोर्ट्स परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विभिन्न उच्च न्यायालयों को पेश आने वाली चुनौतियों से अवगत करवाया गया है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की कम्प्यूटर कमेटी के सदस्य न्यायमूर्ति सुरिंदर गुप्ता ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद किया।