दुर्गम क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा की राह आसान

रायपुर, 13 नवम्बर 2017–(छत्तीसगढ)——–राज्य के दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों के विद्यार्थी जो विषम परिस्थितियों के चलते अपनी उच्च शिक्षा पूरी नहीं कर पाते थे, उन्हें विभिन्न स्थानों पर आवासीय महाविद्यालय में उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

राज्य शासन के इस निर्णय को मूर्त रूप देने के लिए राज्य के पांच जिला मुख्यालयों में आदर्श आवासीय महाविद्यालयों की शुरूवात शिक्षा सत्र 2015-16 से की गई है। यहां भौतिकी, गणित, कम्प्यूटर साईंस, वाणिज्य, प्राणीशास्त्र, रसायन शास्त्र और वनस्पति शास्त्र विषय के स्नातक स्तर की पढ़ाई जारी है।

छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने यहां बताया कि राज्य के पांच जिला मुख्यालयों में 50-50 सीटर आवासीय महाविद्यालय शिक्षा सत्र 2015-16 से प्रारंभ कर दिए गए हैं।

रायपुर के शासकीय नागार्जुन स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय, राजनांदगांव के शासकीय दिग्विजय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुर्ग के शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कांकेर के शासकीय भानुप्रतापदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय और बस्तर (जगदलपुर) के शासकीय काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में कक्षाएं संचालित हो रही हैं। यहां दूरस्थ इलाकों के 357 विद्यार्थी स्नातक स्तर के पढ़ाई कर रहे हैं।

राजनांदगांव, दुर्ग, कांकेर और रायपुर में आदर्श आवासीय महाविद्यालय के भवनों का निर्माण किया जा रहा है। बस्तर (जगदलपुर) में भवन निर्माण के लिए स्थान चयन करने की कार्रवाई चालू है। शीघ्र ही जगदलपुर में भी आवासीय महाविद्यालय के भवन निर्माण का कार्य शुरू कर जाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री पांडेय ने बताया कि छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास भवन का निर्माण किया जा रहा है। भवनों के निर्माण पूर्ण होने तक कक्षाएं मुख्य महाविद्यालय में संचालित हो रही हैं। महाविद्यालय के छात्रावास भवन के पूर्ण होने पर छात्र-छात्राओं को स्वयं का आवासीय परिसर उपलब्ध हो जाएगा।

अगले शिक्षा सत्र 2017-18 में स्वयं के भवन में आदर्श आवासीय महाविद्यालय का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। राज्य के दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी जो महाविद्यालयीन शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, वे अपनी सुविधानुसार अपने नजदीक के महाविद्यालय में प्रवेश ले सकते हैं।