गैरलोकतांत्रिक कानून यूपीकोका के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान- रिहाई मंच

दलितों, मुसलमानों और पिछड़ों को फंसाने के लिए योगी सरकार ला रही है यूपीकोका

लखनऊ — रिहाई मंच ने योगी सरकार द्वारा यूपीकोका लाए जाने पर सवाल किया कि क्या 2007 में गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ के भाषण के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा जैसी वारदातें इसके दायरे में आएंगी। मंच ने कहा कि यूपीकोका के लिए जो तर्क दिए जा रहे हैं वो बेबुनियाद हैं।

आईपीसी, गैंगेस्टर एक्ट जैसे बहुतेरे कानून हैं जिसके तहत इन आपराधिक मामलों को हल किया जा सकता है इसलिए यूपीकोका लाने का कोई औचित्य ही नहीं है सिवाए इसके कि इसके जरिए मुसलमानों को फंसाया जाए जैसा कि मकोका के तहत किया जाता रहा है।

रिहाई मंच विपक्षी दलों से यूपीकोका के खिलाफ सदन में सवाल उठाने की अपील करते हुए मानवाधिकार और लोकतांत्रिक अधिकारों ंके लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत सूबे में यूपीकोका के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरु करेगा।

रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि टाडा, पोटा, यूएपीए, मकोका, गुजकोका जैसे गैरलोकतांत्रिक कानूनों की अगली कड़ी यूपीकोका है। उन्होंने सवाल किया कि योगी आदित्यनाथ जो घूम-घूमकर कानून व्यवस्था को सुधारने का दावा कर रहे हैं उन्हें बताना चाहिए कि जब सरकार बेहतर कर रही है तो यूपीकोका जैसे कानूनों की क्या जरुरत है।

उन्होंने कहा कि खुलेआम एनकाउंटर के नाम पर हत्याएं करवाने वाली योगी सरकार में हुई फर्जी मुठभेड़ों में सबसे अधिक मुस्लिम, पिछड़े, दलित समाज के लोग मारे गए। उन्होंने सवाल किया कि बुलंदशहर से लेकर शाहजहांपुर तक मुस्लिम पहचान को लेकर भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं के जो गुनहगार हिन्दू युवा वाहिनी के हैं उन पर क्या यूपीकोका के तहत कार्रवाई होगी?

बलिया की मासूम रागिनी के हत्यारोपी प्रिंस तिवारी जो अपने को योगी सेवक कहता था उस पर क्या यूपीकोका के तहत कार्रवाई होगी? राह चलते सांप्रदायिक व जातीय हत्या करने वालों के खिलाफ क्या योगी सरकार इस कानून के तहत कार्रवाई करने की इच्छा शक्ति रखती है? सहारनुपर में दलित माताओं-बहनों के साथ जो संगठित हिंसा हुई क्या उसके गुनहगारों को ये कानून सजा दिला सकता है?

रिहाई मंच प्रवक्ता ने कहा कि योगी आदित्यनाथ अगर सचमुच कानून व्यवस्था को दुरूस्त करना चाहते हैं तो उन्हें सबसे पहले अपने खिलाफ गोरखपुर साम्प्रदायिक हिंसा मामले में मुकदमा चलाने में रोेड़ा नहीं अटकाना चाहिए, जिसमें वे मुख्य अभियुक्त हैं। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ और कानून व्यवस्था अपने आप में अंतरविरोधी चीज है।

शाहनवाज आलम ने कहा कि लैंड माफिया, खनन माफिया के खिलाफ यूपीकोका को जिस तरह से भाजपा प्रचारित कर रही है उसे बताना चाहिए कि उसकी एंटी भूमाफिया टाॅस्क फोर्स कहां गई, क्या वो सिर्फ वसूली के लिए बनाई गई थी?

रिहाई मंच प्रवक्ता ने कहा कि विधानसभा में चूने के नाम आतंकवाद का हौव्वा खड़ाकर मुसलमानों को बदनाम करने वाली योगी सरकार यूपीकोका के हथियार से मुसलमान युवाओं का भविष्य चैपट करेगी। उन्होंने कहा कि इसका असर प्रदेश में मनुवाद के खिलाफ संघर्षरत भीम आर्मी जैसे आंदोलनों को भी होगा जिनके नेताओं को अभी तो रासुका में निरुद्ध किया जा रहा है वे अब यूपीकोका के तहत फंसाए जाएंगे।

शाहनवाज आलम
प्रवक्ता रिहाई मंच
9415254919