गुजरात -बीजेपी की वापसी-लेकिन–सत्ता विरोधी मतदान पर नहीं-शैलेश कुमार

22.2587°उत्तरी देशांतर और 71.1924° पूर्वी देशांतर
23 डिग्री उत्तरी अक्षांश से 72 डिग्री पूर्वी देशांतर
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2011 जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 60,439,692
पुरुष–31,491,260 तथा महिला – 28,948,432
घनत्व — 308 प्रतिकिलोमीटर, प्रति क्षेत्र वर्ग किलोमीटर -196.244
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ब्राह्मण , पटेल (स्वामीनारायण सम्प्रदाय के शाकाहारी, मुख्य तौर पर सौराष्ट्र में ) और बनिया बीजेपी का बायां -दायाँ हाथ।
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गुजरात में कांग्रेस शासन -1 मई 1960 से लेकर 12 मई 1971,
— 3 मई 1971 से 17 मार्च 1972 राष्ट्रपति शासन।
— कांग्रेस शासन -17 मार्च 1972 से 9 फ़रवरी 1974।
— 9 फ़रवरी 1974.से 18 जून 1975 राष्ट्रपति शासन।
— 18 जून 1975 से 12 मार्च 1976 -जनता फ़्रंटस।
— 12 मार्च 1976 से 24 दिसंबर 1976 राष्ट्रपति शासन।
— 24 दिसंबर 1976 से 10 अप्रैल 1977 -कांग्रेस शासन।
— 11 अप्रैल 1977 से 17 फ़रवरी 1980 जनता पार्टी।
— 17 फ़रवरी 1980 से 6 जून 1980 -राष्ट्रपति शासन।
— 7 जून 1980 से 3 जून 1990 -कांग्रेस शासन।
— 4 मार्च 1990 से 25 अक्टूबर 1990 -जनता दल -बीजेपी।
— 25 अक्टूबर 1990 से 17 फ़रवरी 1994 -जनता दल (जी) और कांग्रेस।
— 17 फ़रवरी 1994 से 13 मार्च 1995 तक कांग्रेस।
— 14 मार्च 1995 से 19 सितम्बर 1996 – बीजेपी।
— 19 सितम्बर 1996 से 23 अक्टूबर 1996 -राष्ट्रपति शासन।
— 23 अक्टूबर 1996 से 4 मार्च 1998 -राष्ट्रिय जनता पार्टी।
— 4 मार्च 1998 से 6 अक्टूबर 2001 – बीजेपी केशु भाई पटेल।
— 7 अक्टूबर 2001 से 22 मई दिसंबर 2014 -बीजेपी नरेंद्र मोदी।
————————-वर्तमान में बीजेपी सरकार ———————
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——————– 2011 के जनगणना के अनुसार :————–

कुल हिन्दू —-88.57 %—- कुल मुस्लिम —9.67 %— ईसाई -0.52 %–सिख–0.10 %—-बुद्धिस्ट—-0.05 %— जैन–0.96 %—– अन्य —-0.03 %-

———————ग्रामीण जनसँख्या :————————–

हिन्दू–93.36 %–कुल मुस्लिम—5.91 %—ईसाई–0.47 %—सिख–0.03 %–
बुद्धिस्ट–0.02 %— जैन —–0.13 %– अन्य –0.02 %

—————————-शहरी जनसंख्या————————
हिन्दू—82.13 %— कुल मुस्लिम —14.75 %—ईसाई–0.60 %—सिख–0.18 %%–
बुद्धिस्ट —0.09 %— जैन —–2.08 %—अन्य –0.04 %

———————-नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो —————-
सिर्फ 2013 में कुल अपराध –157,435, इसमें हिंसात्मक अपराध -7660 और सम्पति अपराध 20,597,है। राष्ट्री अपराध रिपोर्ट के (218.67 ) तुलना में गुजरात में 260.48 % अधिक हुआ है।

सभी अपराधों में 10 वां स्थान ,ह्त्या में 13 स्थान ,बलात्कार में 18 स्थान ,लूट में 8 स्थान,चोरी 11 स्थान ,डकैती -5 स्थान ,अपहरण में 9 स्थान , दंगा में 13 स्थान (सभी आंकड़ा –राष्ट्रीय अपराध अन्वेषण ब्यूरो -द्वारा जारी )

2014 में कुल अपराध 131388
अपराध के दरें -213.3 %,भारत में कुल-229.2 % शारारिक अपराध –44860,72.8% सम्पति अपराध–20334,आर्थिक अपराध-2986 एसएसएल अपराध-290914,अपराध की दरें-472.4 % (भारत में कुल-351.9%)
हिंसात्मक अपराध- 8629,दरें- 14 %,बालअपराध-3219,महिला-10837,दरें-37.2% अनुसूचित जाति के विरुद्ध अपराध-1130,दरें-ं27.7 % अनुसूचित जन जाति-229,
आईपीसी के तहत गिरफ्तार –180946, दरें-293.8%,साइबर क्राईम-227,साइबर क्राईम के तहत गिरफ्तार-174,अपहरण-2722,दरें-4.4%,.

2015 —
कुल अपराध–126935,दरें-6 %,शारीरिक अपराध -41771,दरें -67% सम्पति अपराध-19661, आर्थिक अपराध -3204,5.1 %,एसएसएल अपराध-307108 दरें-492.7%,हिंसात्मक अपराध- 8046, दरें-12.9 %,महिला अपराध-7762, दरें-26.3%,बाल अपराध-3623,दरें -17.5%, बाल तस्कर-4, अनुसूचित जाति के विरुद्ध अपराध-1046,दरें-25.7%,अनुसूचित जनजाति-256,आईपीसी के तहत गिरफ्तार-174512,दरें 280 %, साइबर क्राईम 242,साइबरक्राईम के तहत गिरफ्तार -272, अपहरण -2108.

2014 में कुल अपराध –405–यौन शोषण, 841 रेप.2185 अपहरण की घटनायें और 23 दहेज उत्पीडन से मृत्यु.
2015 में कुल अपराध– 503 रेप,1569 अपहरण 12 दहेज उत्पीडन से मृत्यु. यौन शोषण 536
2015 -अपराध में महिला अपराध 10.9% की गिरावट आई है. आनन्दी बेन पटेल की सरकार में विभिन्न अपराधों के ग्राफ में गिरावट आई है. अर्थात अपराध नियंत्रण हुआ है.
—————नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो ———–
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2015—घोटाला —
मत्स्य पालन -400 करोड़ बीजेपी , एनटीसी लैंड घोटाला -709 करोड़ शंकर सिंह बाघेला,कांग्रेस.
2009 – स्नूपगेट विवाद (महिला दुरूपयोग)-बीजेपी,बड़ोदरा गन्ना घोटाला-18.7 करोड़।
2012 – गुजरात विधान सभा में कैग रिपोर्ट -पीएसयू वित्तीय घोटाला -17000 करोड़

निवेश- वाइब्रेंट -गुजरात
2013 -12 लाख करोड़ रूपये लक्ष्य तथा 17 000 रूपये पर हस्ताक्षर।
2015 – 25 लाख करोड़ का लक्ष्य के साथ 21304 एमओयू पर हस्ताक्षर। 21 000 करोड़ रूपये पर हस्ताक्षर।
2017 – 30 लाख करोड़ का लक्ष्य के साथ 21910 एमओयू पर हस्ताक्षर की प्रतिज्ञा।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश गुजरात सबसे आगे है – अभी तक 50 से अधिक 36 बिलियन ( 22,610 करोड़ रूपये ) डॉलर का निवेश प्रक्रिया प्रोन्नति पर । 2015-16.में 2.24 बिलियन डॉलर (14,667 करोड़ रूपये ) का निवेश
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प्रथम -11 वर्ष—1966 से 1977 तक स्व० श्री मति इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री

1969 गुजरात दंगा – कांग्रेस के हितेन्दर देसाई के मंत्रित्व काल में दंगा। हिन्दू और मुस्लिम। सितम्बर-अक्टूबर तक.

अधिकारिक रिपोर्ट – 660 लोग मारे गए , 1074 लोग घायल हुए । 48,000 लोगों की सम्पति की क्षति हुई। अनाधिकारिक रिपोर्ट – 2000 लोगों की मृत्यु हुई । 512 लोगों की मृत्यु में से 430 मुस्लिम थे। 42 मिलियन सम्पति की क्षति हुई। सिर्फ मुस्लिम का ही 32 मिलियन सम्पति की क्षति हुई।

जस्टिस जग्गमोहन रेड्डी आयोग ने हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी को दोषी सिद्ध ठहराया ।

अहमदाबाद के हिन्दू मंदिर पर 18 सितम्बर 1969 में आक्रमण के बाद यह दंगा शुरू हुआ।

1960, 1961 और 1971 में हिन्दू- मुस्लिम तनाव बढ़ा जिसके कारण 685 लोग इस सांप्रदायिक दंगे में मारे गये। (114 गांवों में दंगा फ़ैल गया) जबकि 1969 के दंगे में 578 लोग मारे गये।

1960 के बाद भारी संख्या में कपड़ा मिल में प्रवासी मजदूरों की बढ़ोतरी हुई। अहमदाबाद के बडे- बडे 7 मिल बंद हो गये । जिसके कारण 17,000 दलित कामगार बेरोजगार हो गए। स्थानीय मुस्लिम हिंदूओं से कहीं दक्ष बुनकर हैं, इस सोच से हिन्दू कामगार असुरक्षित महसूस करने लगे। इसी कारण से दलित हिन्दू और मुस्लिम के बीच झुग्गियों में दंगा शुरु हुआ।

1969 के बाद 1992-93 और 2002 में दंगों कि पुनरावृति हुई।
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गुजरात में सभी पार्टी अपने – अपने दांव आजमायेंगे.विपक्षी इसलिये मूंछ पर हाथ फेर रहे हैं कि -केंद्र में गुजरात और राज्य में बीजेपी है.इसलिये पराजित करना गर्व की बातें हैं।

विपक्षी जीतने के लिये हर हथकंडे अपनाने की कोशिश में है। जनता को ठेस पहुंचाने वाले (महिला रेप, बाल अपराध, दलित की पीटाई,हत्यायें आदि) हर विकल्प ढूंढ रही है। वर्तमान में विपक्षी के हाथ में तीन तलाक,नोट बंदी,जीएसटी जैसे अमोघ अस्त्र है.

सवाल है कि विपक्षी के पास नेतृत्व ही नही है और जो है भी वह जनता के लिये ढेर का बीज है. जो नये युवा वर्ग सामने आ रहें है वे कांग्रेस या आम आदमी पार्टी या स्थानीय पार्टी में ही जायेंगे विक्षुब्ध लोगों का वोट सत्ता तक पहुंचाने में मददगार नही है।

जनता को सबल नेतृत्वकर्ता चाहिये जो गुजरात में नही है. इस अवस्था में यह देखना है कि बीजेपी जीतने के लिये क्या हथकंडा अपना रही है ? बीजेपी का एक बडा सहयोगी जाति-पटेल पहले से ही कन्नी काट रहे हैं. ब्राह्मण वोट जिस दिस बहे बयार ताहि दिस किजै पीठ पर निर्भर है।

बेरोजगार युवा वर्ग (लडका -लडकी), दलित तबका, महिलाऐं और ऋणी किसान वोट निर्णायक है। इसलिये इन लोगों के साथ घटीत हर छोटी – छोटी घटनाओं को विपक्षी तिल का तार बनाने का प्रयास करेंगे।

कांग्रेस को जो सीटें मिलेंगी वह सिर्फ विपक्षी की भूमिका निभाने के लिये मिल रही है,सत्ता के लिये नही।

अगर बीजेपी धैर्य,सहनशील और सुरक्षित कदम उठाते हुए अपने गिरती हुई साख को उपर उठाने की कोशिश करती है तो निश्चित ही बीजेपी की वापसी हो रही है। अब बीजेपी को यह देखना है कि किस- किस क्षेत्र में साख पर बट्टा लग रही है।

अनवरत बीजेपी के शासन के कारण कई विधायक क्षेत्र को उपेक्षित दृष्टि से देखने लगे हैं और जनता इन विधायकों से नफरत करने लगी है। ऐसे विधायक पार्टी के लिये खतरनाक है.

अगर गुजरात में सत्ता विरोधी मतदान हुआ तो फिर बीजेपी की सरकार नही बनेगी लेकिन सत्ता विरोधी मतदान करवाने के लिये विपक्षी के पास धारदार विकल्प होना चाहिये।

मतदाताओं पर मनोवैज्ञानीक प्रभाव— आज गुजरात देश के प्रधानमंत्री ही नही विश्व को सशक्त नेतृत्व दिया है जिसके कारण भारत की अंतरराष्ट्रीय महत्व बढा है. गुजरात ने ही आज राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं को हल करने का साहस किया है जिसके कारण अहम फैसले लिये गये.
जैसे – तीन तलाक,नोट बंदी,जीएसटी और सरदार सरोवर बांध का निर्माण।