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Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
नवरात्र मात्र उपवास और कन्याभोज नहीं है
नवरात्र मात्र उपवास और कन्याभोज नहीं है : डॉ नीलम महेन्द्र (लेखिका वरिष्ठ स्तम्भकार) चैत्र मास की शुक्लप्रतिपदा यानी नव संवत्सर का आरम्भ। ऐसा नववर्ष […]
वैश्विक हिंदी सम्मेलन : जिस देश के गुरुकुल इतने समृद्ध हों उस देश को आखिर कैसे गुलाम बनाया गया होगा ?
इंग्लैंड में पहला स्कूल 1811 में खुला उस समय भारत में 7,32,000 गुरुकुल थे, डॉ. रजनीश शुक्ल,————– *मैकाले का स्पष्ट कहना था कि भारत को […]
गारंटी या न्याय : क्या होगी जनता की पसंद या मोदी की गारंटी बनाम कांग्रेस का न्याय : सुरेश हिंदुस्तानी
गारंटी या न्याय : क्या होगी जनता की पसंद या मोदी की गारंटी बनाम कांग्रेस का न्याय सुरेश हिंदुस्तानी — लोकसभा चुनाव की तैयारी के […]
जलवायु परिवर्तन और दिव्यांगता: एक अनदेखा संबंध
दीपमाला पाण्डेय———————– साल 2023 में पृथ्वी की औसत भूमि और महासागर की सतह का तापमान 20वीं सदी से 2.12 डिग्री फ़ारेनहाइट (1.18 डिग्री सेल्सियस) अधिक था। यह आंकड़ा साल 1850 से अब तक […]
क्यों महिलाएं अपने अधिकारों के लिए आज भी संघर्ष कर रही हैं ? : डॉ नीलम महेंद्र
ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में मानव के रूप में जन्म लेना एक दुर्लभ सौभाग्य की बात होती है। और जब वो जन्म एक स्त्री […]
डिजिटल कौशल से सशक्त बनती महिलाएं : सैयद तैय्यबा कौसर
पुंछ, जम्मू —— वर्तमान युग यदि महिलाओं का युग कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इस युग में महिलाओं ने हर क्षेत्र में खुद […]
आसान नही है शिव होना : मेधावी महेन्द्र
प्राण तो सबको प्रिय हैं। परंतु पृथ्वी के झुझारू रूप से चलने हेतु , हर कल्प में प्राण रूपी शक्ति को खुद से पृथक करने […]
लैंगिक समानता का मूल चिंतन: डॉ नीलम महेंद्र (लेखिका वरिष्ठ स्तम्भकार)
ईश्वर की बनाई इस सृष्टि में मानव के रूप में जन्म लेना एकदुर्लभ सौभाग्य की बात होती है। और जब वो जन्म एक स्त्री के […]
कलियुग के कलम युग में कलमकार, कलम की शक्ति का दुरुपयोग नहीं करें सदुपयोग : प्रकाश
झारखंड जमशेदपुर : आपसे आग्रह पूर्वक कहना है कि साहित्य सरोवर मंच के तत्वाधान में कदमडीह में काव्य सह विचार गोष्ठी आयोजित की गई, गोष्ठी […]
