बालिकाओं की कथित बिक्री और दुर्व्यापार का स्वतः संज्ञान : राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

नई दिल्ली: —– एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से महाराष्ट्र के शहरों में बालिकाओं की कथित बिक्री और दुर्व्यापार का स्वतः संज्ञान लिया

कथिततौर पर, माता-पिता गरीबी और अन्य कारणों से अपनी बेटियों को बिचौलियों को 3 लाख से 5 लाख रुपये में बेच देते हैं

आयोग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें बताया गया है कि मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की सीमाओं से लगे कई जिलों में बड़ी संख्या में नाबालिग बालिकाओं को उनके माता-पिता द्वारा कथित तौर पर 3 लाख से 5 लाख रुपये में बिचौलियों के हाथों बेचा जा रहा है। इसके बाद बिचौलिये फर्जी दस्तावेजों की सहायता से इन छोटी बालिकाओं को अपनी गोद ली हुई संतान दर्शाकर उनका दुर्व्यापार करते हैं। वयस्क होने पर उनकी पहचान छिपाने के उद्देश्य से उनके व्यक्तिगत विवरण बदल दिए जाते हैं और उन्हें महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में देह व्यापार के लिए 35 लाख से 40 लाख रुपये में बेच दिया जाता है।

आयोग ने पाया है कि यदि समाचार रिपोर्ट में दी गई जानकारी सही है, तो यह पीड़ित बालिकाओं के मानव अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। अतः आयोग ने मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं महाराष्ट्र के मुख्य सचिवों तथा पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

30 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी एवं अन्य कारणों से माता-पिता अपनी बच्चियों को बेच देते हैं। उक्त मीडिया रिपोर्ट में ऐसे दुर्व्यापार की शिकार हुई बालिकाओं के चार विशिष्ट मामलों का भी उल्लेख किया गया है।

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