भारत में मौजूद मल्टीनेशनल कंपनियों के ग्लोबल सेंटर AI का इस्तेमाल

28 मई (Reuters) – चाहे वे डाइपर बेचने के लिए किसी आदर्श “मॉम फ्लुएंसर” (momfluencer) को ढूंढ रहे हों, या दवाओं को तेज़ी से लॉन्च करने के लिए ढेर सारे डेटा को खंगाल रहे हों, भारत में मौजूद मल्टीनेशनल कंपनियों के ग्लोबल सेंटर AI का इस्तेमाल अब ज़्यादा से ज़्यादा क्रिएटिव तरीकों से कर रहे हैं।

कई ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के प्रमुखों ने Reuters को बताया कि वे AI का इस्तेमाल कई तरह के कामों में कर रहे हैं – मार्केटिंग और कंटेंट बनाने से लेकर फाइनेंस और ह्यूमन रिसोर्स तक – ताकि उन कामों को ऑटोमेट किया जा सके जिनमें पहले घंटों की मैन्युअल मेहनत लगती थी और जो समय लेने वाले और बार-बार दोहराए जाने वाले होते थे।
और यह महत्वाकांक्षा यहीं नहीं रुकती। AI अब चैटबॉट्स से काफी आगे निकलकर कॉर्पोरेट के मुख्य कामकाज (engine room) तक पहुंच गया है – GCCs इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके दूरगामी इनोवेशन को बढ़ावा दे रहे हैं।

उदाहरण के लिए, भारतीय हॉस्पिटल चेन Apollo Hospitals (APLH.NS) ने Microsoft के साथ मिलकर एक AI क्लिनिकल असिस्टेंट अपनाया है, जो डॉक्टरों को मरीज़ों का डेटा इकट्ठा करने और जल्दी से ज़रूरी जानकारी (insights) निकालने में मदद करता है।

Microsoft India और South Asia के प्रेसिडेंट पुनीत चंदोक ने कहा, “इससे डॉक्टरों को 20% समय वापस मिल जाता है। और मरीज़ों को भी 20% समय वापस मिल जाता है।”
U.S. डिपार्टमेंट स्टोर चेन J.C.Penney की मालिक कंपनी Catalyst Brands के बेंगलुरु सेंटर में टीमें, प्रोडक्ट के विज़ुअल और वीडियो बनाने के लिए कंप्यूटर-जेनरेटेड इमेजरी का ट्रायल कर रही हैं।

Catalyst के India Managing Director निहार निधि ने कहा कि AI की मदद से फोटो शूट के लिए दुनिया भर में इन्वेंट्री (सामान) को इधर-उधर ले जाने की ज़रूरत कम हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे प्रोटोटाइप का ट्रायल करने में बेंगलुरु “सबसे आगे” (at the nose of the rocket) है।

Huggies डाइपर बनाने वाली कंपनी Kimberly-Clark भी मार्केटिंग प्रक्रियाओं को तेज़ करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही है। इसमें एक ऐसा इंटरनल टूल भी शामिल है जो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की पहचान करने और उनका मूल्यांकन करने में मदद करता है, ताकि कंपनी अपने प्रोडक्ट्स का प्रचार कर सके और ज़्यादा लोगों तक पहुंच बना सके।

दवाओं के डेटा से लेकर खर्च की रिपोर्ट तक

डेनमार्क की कंपनी Novo Nordisk (NOVOb.CO) दवाओं को लॉन्च करने की प्रक्रिया के कई अहम हिस्सों में AI का इस्तेमाल कर रही है। इनमें रेगुलेटरी दस्तावेज़ों का मसौदा तैयार करना, सुरक्षा डेटा का विश्लेषण करना और कमर्शियल एनालिटिक्स में मदद करना शामिल है। यह दुनिया भर की दवा कंपनियों के प्रयासों के अनुरूप है – Amgen (AMGN.O) से लेकर AstraZeneca (AZN.L) तक – जो AI का इस्तेमाल करके ट्रायल में हिस्सा लेने वालों की पहचान ज़्यादा तेज़ी से कर रही हैं और दवा सुरक्षा रिपोर्ट बनाने में लगने वाले समय को कम कर रही हैं, जिससे संभावित रूप से लाखों डॉलर की बचत हो सकती है।

IBM India में, इंजीनियरों ने एक टॉप कॉलेज और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर AI-आधारित हवा की गुणवत्ता की निगरानी करने वाले सिस्टम शुरू किए हैं।
IBM सरकार के साथ मिलकर AI को अपनाने के तरीकों पर भी काम कर रहा है और कौशल बढ़ाने की पहलों में मदद कर रहा है।

Workday India के प्रेसिडेंट सुनील जोस ने कहा कि यह बिज़नेस सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी पेरोल, भर्ती और वित्त से जुड़े कामों के लिए AI टूल बनाने के लिए वैश्विक टीमों के साथ मिलकर ज़्यादा से ज़्यादा काम कर रही है।

जोस ने कहा, “हमारे लिए, अब यह सिर्फ़ यह कहने की बात नहीं रही कि – अरे, हम भी उस श्रेणी का हिस्सा हैं जहाँ हम लेगो मॉड्यूल की तरह कुछ मॉड्यूल बना देंगे। अब बात पूरे मॉडल को मिलकर बनाने की है,” उन्होंने बड़े निगमों के कामकाज में GCCs की भूमिका पर ज़ोर देते हुए यह बात कही।

Leave a Reply