विश्वासघाती अमेरिका , उल्लू भारत: आगे भात पीछे लात: शैलेश कुमार

भारत में 2014 से पहले यह विश्वास था की कांग्रेस द्वारा किया गया सभी जनविरोधी, देश विरोधी ,हिंदू विरोधी कानून को खत्म कर समग्र भारत कल्याण का एक मिशन पर काम होगा और विश्व पर भारत आधिपत्य जमाएगा।

2014 के बाद आने वाले हिंदू सरकार,  हिंदू के चोले ओढ़े हुए,भारत में शासन प्रणाली में निखार लाएगी और साथ ही बेहतर व्यवस्था की कल्पना की गई ।

2014 के बाद जो व्यवस्था हुआ ,वह सभी के इच्छाओं पर पानी फेर दिया। जनता को सताने वाली घोर निंदनीय कदम उठाया जा रहा है।

इससे  यही झलक रहा है कि कांग्रेस/ यूपीए गठबंधन से कहीं अधिक बेकार, जन विरोधी बीजेपी हिंदू  कहने वाली हिंदुओं के नाम पर वोट उगाहने वाली सरकार निकम्मी है।

अमेरिका जो पाकिस्तान का कट्टर समर्थक था और है, से भारत ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया , अमेरिका यही अवसर चाह रहा था कि वह भारत को कर्ज के तले दबाकर अपने अधीन कर ले, भारतीय बाजार को दबोच लें।

बीजेपी मोदी सरकार ने अमेरिका में कई प्रक्रिया चलाई। ट्रंप की सरकार को जीतने के लिए। ट्रंप को सरकार में लाने का हर संभव  प्रयास किया।

भूमंडलीय ध्रुवीकरण के लिय सभी प्रयासरत रहते हैं।

अमेरिका ने भारत के साथ दोस्ती नहीं शतप्रतिशत  व्यापारिक क्षेत्र में गद्दारी की है।

ईरान ट्रंप का दुश्मन इसलिए है कि वह ईरान का तेल पर शासन करना चाहता है। ईरान का तेल भारत में सस्ता है,

भारत से ईरान का संपर्क तोड़ने के लिए अर्थात उसे तेल न खरीद कर अमेरिका से उच्चे दर पर तेल खरीदे ,इस उद्देश्य से ही  उसने भारत पर 50% टैरिफ लगाया। उसने इस माध्यम से भारत – रूस संबद्ध प्रभावित किया।

मोदी भारत को ईरान और रूस से संबंध बिगाड़ने में , अमेरिका की कौन सी भारतीय नीति में भलाई दिखी ?

अब भारत , अमेरिका से 50% टैरिफ पर,  माल खरीदेगा।

भारत के उद्योगपति अर्थात सर्विस सेंटर इसे खरीदेगा.असेंबल करेगा और हम तक बचेगा यानी खुदरा विक्रेता को बेचेगा।

अब भारत को कितना चुकाना पड़ा ??

भारत अमेरिका से 50% टैरिफ पर सामान खरीदेगा, भारत टैरिफ चुकाया , सोना में। सोना बेचकर। सोना किसका ? हम भारतीय का।

यहां के सर्विस सेंटर जिसे भारत में उद्योगपति कहा जाता है उसे असेंबल करेगा। उस पर , वह खुदरा विक्रेता से जीएसटी लेगा।

आप समझ सकते हैं की 50% टैरिफ गोल्ड एक्सचेंज 18% जीएसटी ,  किसको बहन करना पड़ा यह मोदी की सरकार में ऐसा कौन विश्लेषक आ गया जो कि इस वह खूबी और भारत के हित में बता रहा है।

अब चीन चलते हैं —-!

1962 के युद्ध में चीन ने 38,000 वर्ग किलोमीटर अर्थात 14,700 वर्ग मील भारत की भूमि पर कब्जा कर लिया इसे ही अक्साई चिन कहा जाता है

भारत का दुश्मन पाकिस्तान :  5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय भूमि को चीन को दे दिया। चीन के नियंत्रण में कुल भारतीय भूमि 43000 वर्ग किलोमीटर है.

चीन का दाबा:

अरुणाचल प्रदेश का 90,000 वर्ग किलोमीटर के साथ ही  उत्तरकाशी पर भी यह अपना दावा जाता रहा है।

चीन का घेराव नीति एक देखिए:

हेनान द्वीप पर पूर्ण सैनिक बेस बना लिया है।

साउथ चीन के म्यांमार में क्यूपो बंदरगाह हथिया लिया है।

बांग्लादेश का चटगांव पर अपना 9 बिलियन का निवेश।

श्रीलंका के हम्बन टोटा द्वीप , 99 साल के पट्टा पर ले रखा है।

मालदीप के मारव एटोल पर कब्जा।

लाल सागर  : जिबूती द्वीप।

पश्चिम में पाकिस्तान के ग्वादर द्वीप जो हॉर्मुज बंदरगाह के मुहाने पर है।

वर्तमान में चीन का व्यापारिक संबंध:

यह कोई दो राय नहीं है कि हमारा दुश्मन नंबर एक चीन है, जो दुश्मन नंबर दो पाकिस्तान को हीमोग्लोबिन सप्लाई कर रहा है फिर भी भारत व्यापारिक क्षेत्र में चीन का आर्थिक गुलाम बन गया है:

आंकड़ा:

चीन का कुल एफडीआई 2000 से लेकर 2026 तक 2.51 मिलियन डॉलर अर्थात 21000 करोड़ रूपए प्लस है।

भारत में कुल एफडीआई का चीनी अंश 0. 32 प्रतिशत है। अर्थात चीन जैसा देश का , भारत में एफडीआई में  फिसड्डी है अर्थात 23 वें स्थान पर है।

अब भारत में चीन का आयात 131.6 बिलियन डॉलर। अप्रैल 2026 तक 12 अरब डॉलर अर्थात 20. 85% की वार्षिक वृद्धि हुई।

मोदी सरकार की  भारतीय आर्थिक नीति विकास के चरम उत्कर्ष पर है , किसी एंगल से नहीं दिख रहा है।

अमेरिका गला दबा रहा , चीन गला घोट रहा है।

फिर कहा जा रहा है कि भारत का आर्थिक विकास आकाश में फहरा रहा है।

एक कहावत है गाय मार कर जूता दान।

इकोनॉमिक्स किस यूनिवर्सिटी से पास करके मोदी कैबिनेट में शोभायमान है।

यह एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।

विश्वास घाती अमेरिका , उल्लू भारत  !!!!

G7 की बैठक, मोदी ट्रंप मुलाकात की संभावना :

2018 में इंडो पेसिफिक संधि : हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ भाग पर एक  संधि  ,नाम दिया गया था: इंडो पेसिफिक,

G7 की बैठक से पूर्व :

ट्रंप ने इंडो पेसिफिक से इंडो हटाकर अब सिर्फ इसका नाम पेसिफिक रख दिया है। इससे चीन गदगद हो चुका है क्योंकि वह वही चाहता था दक्षिण चीन सागर पर उसका पूर्ण अधिकार है।

ट्रंप का नया विश्व  नक्शा:

इस नक्शे में पाक अधिकृत कश्मीर को,  पाक क्षेत्र का अंग  दिखाया गया है।

अर्थात इस पर भारत का अधिकार नहीं है।

इसे कहते है ,आगे भात, पीछे लात।

ट्रंप भारत के साथ यही कर रहा है

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