मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और उपलब्ध प्रति के फटे एवं अपठनीय होने का हवाला देकर सूचना देने से इनकार : बहाना नहीं चलेगा — पटना हाई

पटना हाई कोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) कानून को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी सरकारी रिकॉर्ड के फटे, अपठनीय या गायब होने का हवाला देकर आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य और उसके अधिकारी अपने ही रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में हुई विफलता का लाभ नहीं उठा सकते।

जस्टिस राज कुमार की एकलपीठ ने सिवान जिले के मोहम्मद रिजवान की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। मामला सिवान सदर अंचल से संबंधित बरवाड़ा रजिस्टर और रजिस्टर-2 की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराने से जुड़ा था।

आठ सप्ताह में रिकॉर्ड का पुनर्निर्माण करने का आदेश:

याचिकाकर्ता ने संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति मांगी थी, लेकिन अधिकारी ने मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने और उपलब्ध प्रति के फटे एवं अपठनीय होने का हवाला देकर सूचना देने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने इस रवैये को आरटीआई कानून की भावना के विपरीत माना।

अदालत ने निर्देश दिया कि जिला प्रशासन पहले अंचलाधिकारी कार्यालय, भूमि सुधार उपसमाहर्ता कार्यालय और जिला अभिलेखागार में चार सप्ताह के भीतर बरवाड़ा रजिस्टर की तलाश करे। यदि रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और प्रविष्टियों के आधार पर उसका पुनर्निर्माण किया जाए। पूरे आदेश का पालन आठ सप्ताह के भीतर सुनिश्चित करने को कहा गया है।

फटे रिकॉर्ड को भी सुरक्षित कर सूचना देनी होगी:

कोर्ट ने कहा कि यदि रिकॉर्ड फटा हुआ या पढ़ने योग्य नहीं मिलता है, तो उसे डिजिटल माध्यम से सुरक्षित किया जाए। जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड को बड़ा करके पढ़ा जाए या विशेषज्ञ की मदद से उसे टाइप कराया जाए। इसके बाद संबंधित अंचल कार्यालय से प्रमाणित कर उसकी प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने बरवाड़ा को सरकारी और सार्वजनिक दस्तावेज माना। इसमें सह-हिस्सेदारों तथा उनके द्वारा दिए गए लगान समेत भूमि से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी रहती है। ऐसे दस्तावेज भूमि विवाद और बंटवारे से जुड़े मामलों में साक्ष्य के तौर पर भी उपयोग किए जा सकते हैं।

आरटीआई अपील के निपटारे पर भी टिप्पणी:

हाई कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक प्राधिकरणों का वैधानिक दायित्व है कि वे ऐसे रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि आरटीआई की दूसरी अपील का निपटारा 30 दिनों के भीतर और विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 45 दिनों में किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना से संबंधित दस्तावेजों का निरीक्षण करने का अवसर आवेदक को दिया जाना चाहिए। निरीक्षण से इनकार किया जाता है तो उसका ठोस कारण बताना होगा। आरटीआई की धारा 8 के अपवाद में नहीं आने वाले दस्तावेजों के निरीक्षण से सामान्य आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता।

इस मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के 6 जनवरी 2012 के आदेश और लोक सूचना पदाधिकारी, सदर अंचल सिवान के 28 जून 2011 के आदेश को भी निरस्त कर दिया। अदालत के इस फैसले को आरटीआई के तहत सूचना मांगने वाले लोगों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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