अधिवक्ता अवधेश निगम : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस के.एम. जोसेफ ने नई जनगणना के बाद होने वाले संभावित परिसीमन को लेकर एक गंभीर लोकतांत्रिक चिंता सामने रखी है।
उनका कहना है कि यदि भविष्य में संसदीय सीटों का बंटवारा मुख्य रूप से नई जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो दक्षिणी राज्यों के लोगों के वोटों का तुलनात्मक प्रभाव कम हो सकता है। इससे संसद में इन राज्यों की राजनीतिक आवाज़ और प्रतिनिधित्व को लेकर असंतुलन की स्थिति पैदा होने की आशंका है।
जस्टिस जोसेफ ने इस मुद्दे को अमेरिकी स्वतंत्रता घोषणापत्र के मूल सिद्धांत “Consent of the Governed” यानी “शासितों की सहमति” से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक की सार्थक राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत में लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर 1971 की जनगणना लंबे समय तक आधार रही है। अब नई जनगणना के बाद संभावित बदलावों को लेकर दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संघीय संतुलन पर बहस तेज हो सकती है।
सवाल सिर्फ सीटों की संख्या का नहीं, बल्कि क्या हर भारतीय वोट की राजनीतिक ताकत समान बनी रहेगी
(फेसबुक)
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