बिहार के सभी माता-पिता चिंता मुक्त हो जाएं।
सभी टेंशन दूर किया जा रहा है। रात को 8:00 बजे तक आपके बच्चे स्कूल में ही पढ़ाई करेंगे। ऐसा नवोदित मुख्यमंत्री जी का योजना है।
आपकी लड़कें और लड़कियां स्कूल में रहेंगे तो वहां पर पढ़ाई जो भी हो, लेकिन प्रेमी युगल भगाने की प्रथा चरम सीमा पर पहुंच जाएगा।
आपको यह फायदा है कि लड़की को शादी करने की कोई चिंता नहीं रहेगी । हां, यह हो सकता है कि लड़के और लड़कियां या तो स्कूल में ही शादी कर ले या भाग जायें ।
अगर ऐसा हुआ तो परिवार के लड़के के गार्जन या लड़कियों के गार्जन आपसी खून खराबा में व्यस्त हो जाएंगे। जिससे पुलिस की आमदनी बढ़ेगी ।
जब सूदखोर जनता, अपनी गरिमा को गिरवी रख चुकी होती है , ऐसी अवस्था में इसी तरह की सरकार पैदा होती है जो अपराधों की नगरी सजाती है।
बिहार की शिक्षा व्यवस्था ही नहीं , समग्र देश की शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ बीजेपी या एनडीए ही नहीं कांग्रेस ने कब्र खोद डाली है,
वर्तमान की सरकार,सिर्फ इस कब्र की गहराई खोद रही है।साथ ही कब्र में धकेलने का काम कर रही है।
एक पौराणिक और कल्पित कथा :
शिव नगरी बनारस या वाराणसी, जिसे शिव की त्रिशूल पर आधारित कपोल कल्पित कथाओं से भ्रमित किया गया है।
यहां पर एक मुक्ति कुआं हुआ करता था।
इस मुक्ति कुआं में कटारे सहित गराड़ी हुआ करता था।
कल्पित स्वर्ग जाने वाले मूर्ख व्यक्ति को यहां के पंडित इसी कुआं में धकेल दिया करता था, जिसे कटार से बंधित गड़ारी छोटी छोटी टुकड़ी में काट दिया करता थां।
इसी तरह की व्यवस्था बिहार की सम्राट चौधरी बीजेपी प्लस एनडीए शिक्षा व्यवस्था करने जा रही है।
जनहित विरोधी सरकार कभी भी जनहित की बात नहीं करती।
सबसे पहले शिक्षा को व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए एनसीईआरटी के सिलेबस से डार्विन के सिद्धांत को समाप्त कर दिया उसके स्थान पर यौन चैप्टर को संलग्न किया गया है। जिससे बच्चों में पढ़ाई की संस्कार कम और यौवनाचार्य की व्यवस्था ज्यादा पनप रही है। चाहे वह गांव की विद्यालय हो या शहर की विद्यालय हो, पहले यह संस्कार महाविद्यालय में विकसित हो रहा था अब यह आठवीं , नवमी , दशमी कक्षा में।
सावधान ! आप अपने बच्चों को स्कूल भेजने से पहले 100 बार सोचिए, क्या यह ऊटपटांग विद्यालय व्यवस्था आपके बच्चों को शिक्षाचार्य बनाने जा रहा है या यौनाचार्य।
विद्यालयों की समय सारिणी के पीछे क्या कारण है ? क्या मानसिकता है ?
आज से 1980 और 90 के दशक में 9.30 बजे से 4:00 तक विद्यालय चला करती थी। किसी बच्चे को कोई परेशानी नहीं । किसी शिक्षक को कोई परेशानी नहीं।
सम्राट चौधरी की उदंड शिक्षण व्यवस्था , गरीब बच्चों पर कई सवाल खड़ा कर रहा है।
क्या गरीब बच्चे खासकर लड़कियां,उपद्रवी व्यवस्था के कारण पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो, उसके माता पिता स्वप्न देखना छोड़ दे।
दूसरा विकल्प : यौनाचार्य के लिय मार्ग पकड़ लें।
बिहार बोर्ड के सिलेबस के 8 वीं कक्षा के विज्ञान से 2 चैप्टर (6-7) 10 वीं के जीव विज्ञान से 2 चैप्टर अविलंब हटाए।
वर्तमान की पागलपन समय सारणी बच्चों को मानसिक परेशानी का कारण है । वर्ग 1 से 8 तक : 6 बजे से 12 बजे तक । वर्ग 9+, 12 से 5 बजे तक।
उदंडता भरी स्कूल की व्यवस्था गरीब बच्चों के लिय मानसिक उत्पीड़न का कारण है।
ऐसा इसलिए कि स्कूल से उसे किसी तरह की मानसिक विकास का विकल्प न मिल सके ताकि वह अग्र सोची बन सके।
अभी दो शिफ्ट में स्कूल क्यों चलाया जा रहा है ?
6 से से 12 और 12 से 5 तक।
आखिर मकसद क्या है ?
स्कूलों में कक्षाओं की संख्या बढ़ा दी गई , लेकिन कमरा नहीं है ।
आखिर विद्यालयों में पर्याप्त भवन निर्माण क्यों नहीं बनवाया गया !
पैसा हुआ क्या ??
जिस स्कूल में 11वीं, 12वीं तक की कक्षा है , तो 12वीं तक का भवन क्यों नहीं है ।
भवन और शिक्षक दोनों है तो, पढ़ाई समय सारणी दो पाली में क्यों है?
अगर भवन और शिक्षक दोनों है तो दो पाली में पढ़ाई क्यों है ??
