जयपुर—————– चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में बेहतर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिये संकल्पबद्ध है। प्रदेश के 13 उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में नवजात शिशुओं को विशेष उपचार की स्वास्थ्य सुविधायें प्रदान करने एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के विशिष्ट जिलास्तरीय कार्ययोजना बनाकर प्रभावी सेवाएं सुनिश्चित की जायेंगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में उपलब्ध संसाधनों एवं सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखकर जिलावार विशिष्ट कार्ययोजना बनाकर लागू की जायेगी।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती वीनू गुप्ता ने स्वास्थ्य भवन में शनिवार को समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिये राज्य स्तरीय अधिकारियों एवं डवलपमेंट पार्टनर यूनिसेफ, यूएनएफपीए, नीपी, जपाईगो एवं सीफू के प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की।
श्रीमती गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2014 के एसआरएस के अनुसार राजस्थान में प्रति हजार जीवित जन्म पर 32 नवजात मृत्यु दर है एवं वर्ष 2030 तक इसे कम करके 12 प्रति हजार पर लाने का ग्लोबल लक्ष्य निर्धारित है।
प्रदेश में विशेषकर उच्च प्राथमिकता वाले उदयपुर, बांसवाडा, धौलपुर, डूंगरपुर, करौली, जैसलमेर, जालोर, बाड़मेर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, अलवर, सिरोही एवं बूंदी जिलों बीमार बच्चों के लिये नवजात देखभाल ईकाईयों, प्रसव कक्षों में व्यवस्थायें, स्टाफ की उपलब्धता, इंफ्रास्ट्रक्टर सहित विभिन्न बिन्दुओं के आधार पर जिला स्तरीय कार्ययोजना तैयार की जायेगी। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिये राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए उनके नेतृत्व में विशिष्ट कार्ययोजना तैयार लागू करने की के कार्यवाही करने के निर्देश दिये।
मिशन निदेशक एनएचएम श्री नवीन जैन ने जिला एवं ब्लाक स्तर पर आशा, एएनएम सहित विभिन्न स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिये आयोजित किये जाने वाले प्रशिक्षणों के लिये भी राज्य स्तर से एक नोडल प्रभारी नियुक्त करने पर बल दिया।
उन्हाेंने बताया कि अधिक नवजात मृत्युदर वाले जिलों की वर्तमान स्थितियों के अध्ययन के लिए डवलपमेंट पार्टनर संस्थानों के पांच समूह गैप-एनेलेसिस के लिए बनाएं गये हैं एवं आज की समीक्षा बैठक में इन समूहाें की अनुशंषाआें पर भी चर्चा की गयी है। आवश्यक अनुशंषाओं को नवीन कार्ययोजना में शामिल किया जायेगा।
बैठक में निदेशक जनस्वास्थ्य डा. वीके माथुर, परियोजना निदेशक शिशु स्वास्थ्य डा. रोमेल सिंह, परियोजना निदेशक मातृ स्वास्थ्य डा. तरुण चौधरी सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित थे।
