मदुरै. मद्रास हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि पत्नी को काला कहना या उसके रंग पर टिप्पणी करना पत्नी के खिलाफ अत्याचार या उत्पीड़न नहीं है। कोर्ट ने ये भी कहा है कि पति द्वारा पत्नी के रंग पर टिप्पणी करने के आधार पर ये नहीं कहा जा सकता कि उसने अपनी पत्नी को खुदकुशी के लिए प्रेरित किया।
हाईकोर्ट ने यह फैसला परमसिवम नाम के आदमी की याचिका पर सुनाया जिसकी पत्नी की 12 दिसंबर 2001 को मौत हो गई थी। परमसिवम को तिरुनेलवेलि के जिला और सत्र न्यायाधीश ने पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी ठहराते हुए सात साल की सजा सुनाई थी। साल 2006 में परमसिवम को दहेज उत्पीड़न कानून के तहत तीन साल की सजा सुनाई गई थी।
परमसिवम ने इस सजा के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में अपील की थी। यहां जस्टिस एम. सत्यनारायण ने उसे बरी कर दिया। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि परमसिवम ने कार की मरम्मत और कारोबार शुरू करने के लिए पत्नी से पैसा मांगा था। वह भी उसका ही पैसा था जो उसने अपने ससुर को दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इसे दहेज उत्पीड़न का मामला मानने से इनकार कर दिया
