भगत सिंह के महत्वपूर्ण साथी भगवतीचरण वोहरा का जन्म 4 नवंबर, 1903 को लाहौर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। वे एक गुजराती […]
Category: लेखक के कलम से
केवल लेखक के लिये
रेत पर अमरूद की खेती कर कृषि को नया आयाम देते किसान—- फूलदेव पटेल
मुजफ्फरपुर, बिहार ——– खेती किसानी अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है. प्रत्येक देश का विकास कृषि उत्पादन पर निर्भर है. महामारी के दौरान खेती किसानी ही भारत […]
मूलभूत सुविधा भी नहीं है गांव के स्कूलों में — चित्रा जोशी
उत्तरौड़ा, कपकोट (उत्तराखंड)——– आज़ादी के बाद से ही देश में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई गई हैं. मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा […]
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ़ लड़ाई वैश्विक है :: जानकारी का बेहतर प्रसार करेगा जलवायु परिवर्तन पर वार
जानकारी का सबसे बड़ा स्रोत मीडिया और पत्रकार बंधु हैं। लखनऊ (निशांत कुमार )——- इसी एहम कड़ी के महत्व को ध्यान में रखते हुए, एक […]
सेहतमंद गांव से स्वस्थ भारत मुमकिन है — नरेन्द्र सिंह बिष्ट
हल्द्वानी, नैनीताल———— भारत ने जहां 21वी सदी में प्रवेश किया है वहीं ऐसा लगता है कि पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामो ने स्वास्थ्य सुविधाओं […]
इनके बुलंद हौसले के सामने शारीरिक अक्षमता ने घुटने टेके —— जूही स्मिता
पटना,(बिहार) दिव्यांग होना कोई अभिशाप नहीं है लेकिन अगर कोई व्यक्ति इससे ग्रसित होता है, तो समाज और लोगों की मानसिकता उन्हें लेकर बिल्कुल अलग […]
एनीमिया से ग्रसित झारखंड का ग्रामीण क्षेत्र —– अमरेन्द्र सुमन
दुमका (झारखण्ड) —–+ एनीमिया रक्त से संबंधित एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में आयरन की कमी से होता है. मानव शरीर में जब हीमोग्लोबिन […]
सस्टेनेबल एनेर्जी ट्रांजिशन के लिए राज्य स्तर पर विशेष टास्क फोर्स का गठन ज़रूरी
लखनऊ (निशांत कुमार) झारखंड में सस्टेनेबल एनेर्जी ट्रांजिशन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक विशेष टास्क फोर्स या कमीशन का […]
कोयले की किल्लत नहीं, खराब प्रबन्धन से पैदा हुआ बिजली संकट
लखनऊ (निशांत कुमार) भारत इस वक्त ग्लोबल वार्मिंग की जबर्दस्त मार सहने को मजबूर है। भीषण गर्मी के कारण तापमान बढ़ने से बिजली की खपत […]
1 मई मजदूर दिवस: अपनी मेहनत व लगन पर विश्वास रखते हैं ये, किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं – मुरली मनोहर श्रीवास्तव
मेहनत उसकी लाठी हैं, मजबूती उसकी काठी हैं। बुलंदी नहीं पर नीव हैं, यही मजदूरी जीव हैं। मजदूर का मतलब हमेशा गरीब से नहीं होता […]
