मुजफ्फरपुर, बिहार ——- एक समय था जब कहा जाता था, ‘पढ़ोगे-लिखोगे बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे बनोगे खराब’. मगर बदलते समय के साथ इस कहावत के मायने […]
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लड़कियां बोझ नहीं, ताकत हैं : हेमा रावल
गनीगांव, उत्तराखंड ———- हाल ही में संसद के विशेष सत्र में पास किये गए महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण विधेयक […]
कब होगा दहेज मुक्त समाज ? : तनुजा भंडारी
गरुड़, उत्तराखंड ——- आज़ादी के 75 साल में देश में बहुत कुछ बदलाव आ चुका है. कृषि से लेकर तकनीक तक के मामले में हम […]
पूरा आसमान अपना, मगर दो गज जमीन नहीं : रिंकु कुमारी
मुजफ्फरपुर, बिहार ——- गोपालपुर तरौरा गांव के 45 वर्षीय शिवनंदन पंडित के परिवार में चार से छह लोग रहते हैं. एस्बेस्टस के एक छोटे से […]
शहरों की तरफ पलायन करता गांव : तानिया
चोरसो, उत्तराखंड ——– आज़ादी के अमृतकाल में सभी नागरिकों तक पीने का साफ़ पानी और शौचालय जैसी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य […]
सरकारी स्कूलों में लड़कियों का बढ़ता नामांकन : सपना कुमारी
मुजफ्फरपुर——– जीवन में सफलता प्राप्त करने और कुछ अलग करने के लिए शिक्षा अर्जित करना सभी के लिए महत्वपूर्ण है. यह स्त्री एवं पुरुषों दोनों […]
सब्जी उत्पादन से सालाना लाखों कमाता किसान : फूलदेव पटेल
मुजफ्फरपुर, बिहार ——- आधुनिक समय में नौकरी को उत्तम मानने वाली युवा पीढ़ियों के लिए खेतीबाड़ी सबसे निकृष्ट कार्य समझा जाता है, जबकि कृषि हमारी […]
