कृष्णा कुमारी मीणा(अजमेर)—-“मैंने 12वीं तक विज्ञान विषय से पढ़ाई की है. फिर घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण रोज़गार की तलाश करने […]
Author: shailesh
क्यों किसानों के लिए पशुपालन बोझ बनता जा रहा है?
उर्मिला कंवर (लूणकरणसर)—- हमारे देश में किसानों के लिए कृषि कार्य जितना लाभकारी है उतना ही पशुपालन भी उनकी आय का एक बड़ा माध्यम है. […]
विकास की दौड़ में पीछे छूटते दिव्यांग
शगुन कुमारी (पटना)—-आज के समय में छोटी से छोटी गलियां, मोहल्ले, गांव और शहर विकसित हो रहे हैं. इसके लिए सरकार की ओर से अनेकों […]
स्लम बस्तियों में पानी की गंभीर समस्या
सुनील सैनी(जयपुर)—पूरे राजस्थान में मानसून लगभग सक्रिय हो चुका है. अब तक 190 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है. हालांकि यह सामान्य से दो एमएम कम […]
बुनियादी सुविधाओं से पीछे क्यों रह जाती हैं स्लम बस्तियां?
बंदना कुमारी (पटना)——“आज भी हमलोग को यहां पीने का पानी भरने के लिए सुबह सुबह नल पर लाइन लगाना पड़ता है. अगर ज़रा देर हो […]
कृषि के प्रति नई पीढ़ी का रुझान क्यों घटने लगा है ?
गीता देवी (गया)–आशा के अनुरूप इस बार के केंद्रीय बजट 2024-25 में भी कृषि और किसानों का विशेष ध्यान रखते हुए कई नई घोषणाएं की […]
वायनाड त्रासदी: जलवायु परिवर्तन की नज़र से
लखनउ (निशांत सक्सेना) केरल के वायनाड ज़िले में, ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, डेढ़ सौ से ज़्यादा भरी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में अपनी जान […]
स्वच्छ भारत के नक़्शे में क्यों नज़र नहीं आती स्लम बस्तियां?
ईशा कुमारी (पटना)——-देश को स्वच्छ बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों से केंद्र के स्तर पर लगातार प्रयास किये जाते रहे हैं. एक ओर जहां […]
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की चुनौती
कमल नवाल (उदयपुर)——–मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2024-25 का बजट प्रस्तुत किया, जिसमें सभी सेक्टरों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों के […]
2024 का केंद्रीय बजट: ऊर्जा और पर्यावरण पर ध्यान
लखनउ (निशांत सक्सेना) क्लाइमेट चेंज की चुनौती से निपटने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए मजबूत प्रतिबद्धता का प्रदर्शन करते हुए, वित्त मंत्री […]
