माननीय लोकसभा अध्यक्ष महोदय
लोकसभा/ राज्यसभा और विधान सभा, यह लोकतंत्र का मंच है और विपक्षियों को जनता की समग्र समस्याओं को उठाने का सदन में, असीमित का समय देना चाहिए ।
चाहे सदन रात भर चले क्योंकि सदन का खर्च की भरपाई जनता करती है।
हम देखते हैं कि , आप लोग सता पक्ष के लोगों को बोलने देते हैं, जबकि विपक्षों के लोगों को बोलने नहीं देते, उस वक्त हल्ला करने लगते और यहां तक की माइक भी बंद कर देते हैं।
हम देख रहे हैं कि सदन जो भी हो, चाहे राज्य विधानसभा हो, चाहे लोकसभा हो, जैसे गांव घर की महिला सब लड़ती रहती है, बेटी – रोटी करती है, इस तरह सदन में भी होता रहता है ।
विपक्ष को नहीं बोलने देना ,भी लोकतंत्र की आवाज को कुचलने जैसा है, क्योंकि विपक्ष भी जनता का ही प्रतिनिधि है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष भी ,दोनों , चुनाव से ही सदन में आते है,दोनों जन प्रतिनिधि ही है।
सत्ता पक्ष अपने बारे में एक भी विरोधी शब्द नहीं सुनना चाहती है क्योंकि सत्ता मन्दांध होते हैं ।
विपक्ष को बोलने नहीं देना भी गैर लोकतांत्रिक है और इस पर बहस होना चाहिए।
कुल सत्र में विपक्ष को बोलने के लिय 2-3 पूरे सत्र सुनिश्चित करें।
कानून जो पास करना होता है, उसका ड्राफ्ट, सत्र शुरू होने से 1 सप्ताह पहले विपक्ष को सौंप दें , उनलोगों से सुधार विंदु लें।
फिर सत्र शुरू होता हैं, पहले 3 दिन विपक्ष के लिय सुनिश्चित करें।
इसके बाद विवादरहित सिर्फ जनता के लिय सत्र शुरू होना चाहिए ,जिसमें सभी सदन के सदस्य (पक्ष – विपक्ष) की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करे।
यहाँ सता पक्ष को अर्जुन की तरह सुनने का साहस करनी चाहिए और विपक्ष को (श्री कृष्ण) की तरह.
क्योंकि सत्ता में सुधार करने के सूत्र और कमजोर विंदु सामने आने की भरपूर समय रही होती है, यही सत्ता पक्ष के लिय अमृत काल है।
(शैलेश कुमार, मधुबनी,7004913628)
