मोदी सरकार के अंधभक्त हीरे व्यापारी के कारण अरबों डालर का राजस्व घाटा

मोदी सरकार के अंधभक्त हीरे व्यापारी के कारण अरबों डालर का राजस्व घाटा

(हिंदी अंश, शैलेश कुमार )– सरकारी अधिकारीयों के आँख के नीचे भारतीय हीरों का हवाला के जरिये दक्षिण एशियाई देश थाईलैंड के जरिये पश्चिमी देशों में बेचा जाता है जिससे हीरों के व्यवसाय में अरबों रूपये का चुना लग रहा है। थाईलैंड में हीरा निर्यात पर कस्टम ड्यूटी बहुत लच्चर है।

दक्षिण एशिया में केवल भारत ही हीरों का उत्पादक देश है। यहाँ हीरों की निर्यात पर कस्टम ड्यूटी , एक्साइज ड्यूटी काफी अधिक है जिसके कारण हीरों के व्यापारी काफी मात्रा में कालाधन अर्जित कर रहे हैं। जिससे देश को भारी मात्रा में राजस्व घटा उठाना पड रहा है। यह कार्य हीरो का हब मुंबई और गुजरात से अंधाधुंध जारी है। timthumb

हवाला नेटवर्क के जरिय थाईलैंड और हांगकांग ।

सूरत से संबंधित अधिकांश भारतीय व्यापारी बैंकाक में रह कर हीरे की तस्करी में लिप्त हैं । ये व्यापारी e-Bay & E-tsy जैसे एजेंसी के माध्यम से व्यापार करते हैं ,ये एजेंसी किसी तरह की सूचना की सत्यापन नहीं करती है। खरीददार सस्ते हीरे खरीदने में काफी रूचि लेते हैं।

2 वर्ष पहले पेरिस स्थित फाइनेंसियल एक्शन टास्क फाॅर्स ने आशंका जाहिर किया की भारतीय हीरे की व्यापारी मनी लाउंड्रींग और आतंकवादियों को वित्तीय सहायता पहुँचाने में सहायक हैं । रिपोर्ट की आरोप सत्य है क्योंकि ये पांच देश- इजरायल, बेल्जियम, कनाडा और संयुक्त अमेरिका हीरे की व्यापार से अर्जित राशि को अवैधानिक कोष में उपयोग कर रहे हैं ।

क्या मोदी सरकार इस अंध व्यापारियों के साथ इसलिये हैं क्योंकि ये उनके सहयोगी है ?

यह सही है की अधिसंख्य हीरे की व्यापारीक समुदाय बीजेपी समर्थक है। 2014 के चुनाव में 40,000 व्यापारी (मुंबई) मोदी के लिए मुहीम चला रहे थे।

इन व्यापारियों को मोदी ने चुंगी और स्थानीय टैक्स हटाने का वादा किया जिससे वे लोग ख़ुशी के मारे उछल पड़े।

यह आश्चर्य है की गुजरात और मुंबई से अरबों डालर की अवैध व्यापार के प्रति सरकार सजग नहीं है।

(असम टाइम्स-3 जून 2016)

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