सरकार इन्हें हर महीने ईमानदारी से ₹85,000 की सैलरी देती है।
ACB (Anti-Corruption Bureau) ने इनके घर का दरवाजा खटखटाया, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
₹85,000 कमाने वाले इस साहब के घर से ₹100 करोड़ से ज्यादा का साम्राज्य निकला
नाम है , मोहन नाइक। — ‘Engineer in Chief, Roads & Building Department’।
राज्य की सड़कों और सरकारी इमारतों के ‘भाग्यविधाता’।
20 एकड़ जमीन (मानो पूरा गांव ही खरीद लिया हो)
5 किलोग्राम खरा सोना (सोने के बिस्कुट और जेवरात)
7 आलीशान लग्जरी फ्लैट्स
1 ट्रिपलेक्स विला (जिसकी सिर्फ रजिस्ट्री कराने में ही ₹2.5 करोड़ फूंक दिए)
कुकटपल्ली में एक और आलीशान मकान (कीमत ₹62 लाख)
रसूख और अय्याशी के शौक के लिए 60 विदेशी शराब की बोतलें मुफ्त!
नायक जी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मानसून आते ही सड़कें क्यों बह जाती रही हैं ?
किसी सड़क या पुल के बजट का आधा पैसा इन बड़े अधिकारियों के विला की ईंटों में, इनके फ्लैटों के मार्बल में और इनकी तिजोरियों के सोने में तब्दील हो जाएगा… तो सड़क पर कोलतार (डामर) की जगह सिर्फ धूल और मिट्टी ही तो बचेगी!
सड़कें और इमारतें भ्रष्टाचार के इसी दीमक के कारण ढहती हैं। हम गड्ढों में गाड़ियां उछालते हैं, अपनी रीढ़ की हड्डी तुड़वाते हैं, एक्सीडेंट में अपनों को खोते हैं… और ये साहब लोग हमारे ही खून-पसीने की कमाई से खरीदे गए ट्रिपलेक्स विला के सोफे पर बैठकर विदेशी शराब की चुस्कियां लेते हैं।
मार्च का महीना आते ही एक-एक रुपए का टैक्स बचाने के लिए सीए के चक्कर काटने वाले, मेहनत की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा चुपचाप सरकार की झोली में डाल देने वाले की यह सोच की ताकि देश तरक्की करे, अच्छी सड़कें मिलें, सुरक्षित इमारतें मिलें।
एक सपना बनकर रह गया है ??
सच सामने आया तो पता चला कि इन मगरमच्छों का पेट विकास किया जा रहा है!
यह सिर्फ एक ‘मोहन नाइक’ की कहानी नहीं है। सिस्टम के गलियारों में न जाने कितने ऐसे ‘नाइक’ छिपे बैठे हैं जो जनता के पैसों को दीमक की तरह चाट रहे हैं।
जब तक ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की पूरी संपत्ति जब्त कर के उसे सरेआम नीलाम नहीं किया जाएगा, और इन्हें ऐसी सजा नहीं मिलेगी जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल बने, तब तक यह देश ऐसे ही गड्ढों में रेंगता रहेगा !!
