दिल्ली में आयोजित भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में गुजरात के भूपेंद्र पटेल, हिमाचल के जयराम ठाकुर, उत्तराखंड के पुष्कर धामी समेत अन्य सभी मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही मीटिंग में शामिल हुए थे। योगी आदित्यनाथ का दिल्ली आना और अहम प्रस्ताव को पेश करना अहम संदेश देता है। यही नहीं बैठक में भी वह अमित शाह, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं के साथ पहली कतार में बैठे थे।

2017 और 2018 में राजनाथ सिंह ने पेश किया था प्रस्ताव
भाजपा की 2017 और 2018 में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने इन प्रस्तावों को पेश किया था। इस बार योगी आदित्यनाथ को मौका दिए जाने के सवाल पर निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘उनकी परफॉर्मेंस शानदार है और वह इसके लिए डिजर्व करते हैं।’
निर्मला ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य के मुखिया हैं। हर कोई जानता है कि उन्होंने कोरोना काल में किस तरह से काम किया था। चाहे वह प्रवासी मजदूरों की मदद की बात हो या फिर गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करने का मसला हो।
निर्मला बोलीं- सीएम योगी के काम को कौन नहीं जानता
वित्त मंत्री ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सीनियर सांसद भी रहे हैं। ऐसे में उन्हें राजनीतिक प्रस्ताव पेश करने के लिए आमंत्रित क्यों नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश के चुनावों को भाजपा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यहां से लोकसभा की कुल 80 सीटें आती हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के कद में इजाफा करना भाजपा की रणनीति भी हो सकता है ताकि यूपी में उन्हें अहम चेहरे के तौर पर पेश किया जा सके। इससे नेतृत्व में स्पष्टता दिखेगी और मतदाताओं में इससे योगी की छवि और अधिक मजबूत होने की उम्मीद पार्टी को है।
