राज्य सरकार मछुआरों के हितों की रक्षा और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध

राज्य सरकार मछुआरों के हितों की रक्षा और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राज्य सरकार मछुआरों के हितों की रक्षा और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जायेंगे। श्री चौहान जबलपुर में जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित राज्य-स्तरीय मछुआ सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों की बेहतरी के लिए जिस प्रकार ठोस कदम उठाये हैं, उसी प्रकार मछुआरों की तरक्की के लिए भी गंभीर प्रयास किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि मछुआरों को साहूकारी कर्ज के दुष्चक्र से मुक्त करवाया जायेगा और उन्हें भी जीरो प्रतिशत ब्याज पर कर्ज उपलब्ध करवाया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मछुआरों का 2 लाख रूपये का दुर्घटना बीमा करवाने का भी फैसला किया है। उन्होंने कहा कि परम्परागत मछुआ जातियों को तालाब पट्टा, मत्स्य बीज और अनुदान उपलब्ध करवाने की भी पहल की जायेगी। प्रदेश में मछुआ परिवार के बच्चों के 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी आने पर 1000 रूपए प्रत्येक बच्चे को दिए जायेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्ड जारी किए जायेंगे, जिनसे मछुआरों को मत्स्य परिवहन एवं विक्रय में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होगी। आवास योजना में मछुआरों को मदद दी जायेगी। प्रदेश में अब किसानों की भांति मछुआरों को भी 100 रूपये ऋण लेने पर 90 रूपये ही वापस करने होंगे।

कार्यक्रम को मत्स्य-पालन मंत्री सुश्री कुसुम महदेले ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन, स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री शरद जैन और सांसद श्री राकेश सिंह भी मौजूद थे।

जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र की नव-निर्मित इकाई का लोकार्पण

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के परिसर में लगभग 6 करोड़ रूपयों की लागत से बनी जैव उर्वरक उत्पादन केन्द्र की नव-निर्मित इकाई का लोकार्पण किया। उल्लेखनीय है कि रासायनिक उर्वरकों का जो प्रतिकूल प्रभाव फसल वातावरण तथा जन-मानस के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, इससे बचाने के लिए जैव उर्वरक के उपयोग को प्रोत्साहन देने के प्रयासों की श्रंखला में यह एक अनुपम पहल है ।

इस इकाई द्वारा प्रतिदिन दो टन वाहक आधारित जैव उर्वरक उत्पादन किया जायेगा। इसमें प्रमुख जैव उर्वरक राइजोबियम दलहनी फसलों के लिए, एजोटोबैक्टर दलहनी फसलों को छोड़कर अन्य सभी फसलों के लिए, एजोस्पिरिलम गन्ने की फसल के लिए, पी.एस.बी. सभी फसलों के लिए अति उपयोगी, ट्राईकोडर्मा सभी दलहनी फसलों के लिये उपयोगी एवं उक्टा रोग रोकने के लिए सहायक है।

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