अधिवक्ता स्मृति तिवारी (पटना) —— कक्षा-1 के नन्हें बच्चों की पाठ्यपुस्तक में अगर अमर्यादित या अश्लील शब्दावली छप जाए और महीनों तक उस पर सुधार न हो, तो यह देश की भावी पीढ़ी के संस्कारों के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ है?
इसी अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय पर माननीय पटना उच्च न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल करने का सख्त आदेश दिया है।
क्या है पूरा मामला और हाईकोर्ट की टिप्पणी?
विवादित पुस्तक: NCERT द्वारा कक्षा-1 के बच्चों के लिए निर्धारित हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘सारंगी भाग-01’।
विवादित पंक्ति: सुप्रसिद्ध बाल-कविता “चंदा मामा दूर के…” की दूसरी पंक्ति में अत्यंत आपत्तिजनक और अमर्यादित शब्द का प्रयोग किया गया।
अदालत की सख्ती: अदालत ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि प्राथमिक स्तर के अबोध बच्चों की किताब में ऐसी त्रुटि छपी और शिकायत के बावजूद अब तक इसमें सुधार नहीं किया गया।
अगली सुनवाई: माननीय उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की है।
अधिवक्ता दृष्टिकोण (Legal & Constitutional Perspective):
संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और नैतिक शिक्षा पाना उनका मौलिक अधिकार है। NCERT जैसी शीर्ष राष्ट्रीय संस्था की पुस्तकों में पाठ्यक्रम की छपाई केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का संवेदनशील दायित्व है।
जब व्यवस्था की लापरवाही से बच्चों के मानस पर गलत असर पड़ने का खतरा पैदा होता है, तब उच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप न्यायपालिका के प्रति समाज के विश्वास को और सुदृढ़ करता है।
(एक सजग नागरिक और अभिभावक के रूप में इस विधिक जानकारी को अवश्य साझा करें, ताकि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो सके।)
विधिक अध्ययन एवं जनहित मुद्दों (PIL) की जानकारी हेतु:
Adv. Smriti Tiwari
Advocate, Patna High Court
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(विधिक साक्षरता एवं सामाजिक चेतना के उद्देश्य से संप्रेषित)
