किसानों के बीच नेमाटोड को लेकर जागरूकता के लिए बेयर ने किया राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस

किसानों के बीच नेमाटोड को लेकर जागरूकता के लिए बेयर ने किया राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस

 नई दिल्ली,———- कृषि एवं स्वास्थ्य सेवा से संबंधित लाइफ साइंस के क्षेत्र में कार्यरत वैश्विक कंपनी बेयर ने हाल ही में बेंगलुरु में ‘प्लांट पैरासिटिक नेमाटोड’ को लेकर अपनी तरह का पहला राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित किया। इस कान्फ्रेंस में उद्योग से जुड़े अग्रणी लोगों, बेयर के प्रतिनिधियों और देशभर से 70 से ज्यादा प्रतिष्ठित नेमाटोलॉजिस्ट ने हिस्सा लिया। बेयर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग (भारतबांग्लादेश एवं श्रीलंका) श्री रविशंकर चेरुकुरी ने इस मौके पर सभी को संबोधित किया।

इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य फोकस फसलों में नेमाटोड की समस्या की मौजूदा स्थिति को लेकर था। विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में इस समस्या को रेखांकित किया। कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वाले प्रमुख नेमाटोलॉजिस्ट में डॉ. एच. एस. गौर (पूर्व वाइस चांसलरसरदार वल्लभभाई पटेल यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजीमोदीपुरम तथा पूर्व डीनइंडियन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी रिसर्च इंस्टीट्यूटनई दिल्ली) और डॉ. डी. जे. पटेल (पूर्व डीन एवं प्रधानाध्यापकआनंद एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी) के नाम उल्लेखनीय हैं।

यह राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस फसलों में नेमाटोड के कारण नुकसान का सामना करने वाले किसानों के बीच इसे लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में सही दिशा में उठाया गया कदम है। अन्य कई कीटों एवं बीमारियों की तरह प्लांट पैरासिटिक नेमाटोड केवल कृषि एवं बागवानी की फसलों को नुकसान ही नहीं पहुंचाता है, बल्कि फंगस, बैक्टीरिया और वायरस के कारण होने वाली बीमारियों को भी बढ़ाता है और एक साथ कई बीमारियों का कारण बनता है। कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रतिभागियों और बेयर के प्रतिनिधियों ने संयुक्त उद्यम स्थापित करने जैसे विभिन्न कदमों पर विमर्श किया, जिससे नेमाटोड से निपटने की दिशा में भविष्य आधारित रणनीति तैयार हो और किसानों को स्थायी लाभ हो सके।

इस दौरान बेयर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मार्केटिंग (भारतबांग्लादेश एवं श्रीलंका) श्री रविशंकर चेरुकुरी ने कहा, ‘यह कॉन्फ्रेंस उद्योग जगत का अपनी तरह का पहला कॉन्फ्रेंस है जहां कॉरपोरेट एवं विशेषज्ञ साथ मिलकर एक ऐसे विषय पर विमर्श कर रहे हैं, जिससे सीधे-सीधे किसानों व कृषि समुदाय को नुकसान उठाना पड़ता है। हम किसानों के बीच नेमाटोड को लेकर जागरूकता फैलाने एवं इसका समाधान तलाशने की दिशा में कंपनियों के बीच बेहतर गठजोड़ की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं।’

यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेजबेंगलुरु के प्लांट पैथोलॉजी विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एनजी रविचंद्रा ने कहा, ‘बायोएजेंट्स नोवेल केमिस्ट्री के साथ इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट और पारंपरिक तरीकों को अपनाते हुए सब्जियों में नेमाटोड का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है।’

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पाइस रिसर्च के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एस. ईपेन ने कहा, ‘नेमाटोड-फ्री प्लाटिंग मैटेरियल का प्रयोग, सॉइल लेस प्रोपेगेशन, फ्यूमीगेशन मैथड और नर्सरी सर्टिफिकेशन मसालों व संबंधित फसलों को नेमाटोड की समस्या से बचाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।’

कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने वालों ने उम्मीद जताई कि कॉरपोरेट सेक्टर एवं शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी से उनकी विशेषज्ञता एवं संसाधनों का प्रयोग फसलों में नेमाटोड की समस्या के प्रभावी प्रबंधन में किया जा सकेगा।

Abhishek Verma

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