
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. सी. वी. अनदा बोस ने इस सीएसआर सम्मेलन में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त की और इसे एक विशिष्ट और उद्देश्यपूर्ण आयोजन बताया। उन्होंने समुदायों, विशेष रूप से कोयला खनन क्षेत्रों की जनजातीय पट्टियों में जीवन को बदलने के लिए सीएसआर पहल की शक्ति पर जोर दिया।
उन्होंने कैंसर रोगियों की सहायता के लिए पहल को वित्तपोषित करने के लिए सीआईएल की सराहना की तथा इस बात पर जोर दिया कि ऐसे प्रयास न केवल समुदायों का उत्थान करते हैं, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास में भी योगदान देते हैं।
कोयला मंत्रालय के सचिव ने कोयला कम्पनियों की उनके असाधारण सीएसआर प्रयासों के लिए सराहना की।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले दशक में शुरू की गई परियोजनाओं ने कोयला-त्पादक क्षेत्रों में लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और उनमें बदलाव लाया है।
श्री दत्त ने इस बात पर जोर दिया कि सीएसआर महज एक नियामक दायित्व नहीं है, बल्कि सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाने की नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कंपनियों से इसे आस्था के रूप में अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले समुदाय कोयला कंपनियों की गतिविधियों में समान रूप से भागीदार हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचे में निवेश करके, कोयला कंपनियां अपनी सीएसआर पहल को अगले स्तर तक ले जा सकती हैं। उन्होंने आने वाले वर्ष के लिए थीम-आधारित कैलेंडर बनाने का भी सुझाव दिया, जिसकी शुरुआत शिक्षा से की जाए और बाद में अन्य थीम भी जोड़ी जाएं।
श्री दत्त ने कोयला सहायक कंपनियों को कोयला खनन वाले क्षेत्रों में स्टार्ट-प को बढ़ावा देने और अनुसंधान एवं विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने महिला कल्याण और सशक्तिकरण पर केंद्रित सीएसआर परियोजनाओं के महत्व पर जोर दिया।
कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के अध्यक्ष श्री पी.एम.प्रसाद ने अपने स्वागत भाषण में सीआईएल और उसकी सहायक कंपनियों की सीएसआर गतिविधियों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सीआईएल ने पिछले 10 वर्षों में सीएसआर परियोजनाओं में 5,570 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कौशल विकास, खेल और महिला सशक्तिकरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
श्री प्रसाद ने यह भी कहा कि सी.आई.एल, सी.एस.आर व्यय में शीर्ष तीन महारत्न कम्पनियों में से एक है तथा उन्होंने सी.आई.एल और उसकी सहायक कम्पनियों द्वारा चलाए जा रहे प्रमुख कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
