हरियाणा साहित्य अकादमी का कृति विमर्श

गुरूग्राम (कृष्ण गोपाल विद्यार्थी )—————हरियाणा साहित्य अकादमी के तत्वावधान में मॉडल टाऊन स्थित आर्य समाज सभागार में जिले के तीन साहित्यकारों नरेन्द्र गौड़,वीणा अग्रवाल और जगन्नाथ सोनी की पुस्तकों पर आधारित चर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया।
1
गुरूग्राम के वरिष्ठ कवि मदन साहनी के सानिध्य में हुए इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.अशोक शर्मा अक्स ने की व संचालन अकादमी की शासी परिषद के सदस्य कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने किया। लगभग तीन घंटे चली इस साहित्यिक संगोष्ठी में गुरूग्राम के दर्जनों रचनाकारों सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना के बाद अतिथियों के सम्मान से शुरू हुए इस कार्यक्रम के दौरान वीणा अग्रवाल के बाल साहित्य नन्ही काव्या का लोकार्पण भी किया गया। जगन्नाथ सोनी के काव्य संग्रह ‘जीवन का मकरंद’ पर बोलते हुए कृष्ण लता यादव ने कहा कि पुस्तक में निहित सभी कविताएं मानवीय संवेदनाओं का दर्पण हैं।इनमें शिल्प सौंदर्य बेशक सुगठित ढंग से प्रस्तुत न हुआ हो किंतु अन्तर्मन की पीड़ा व छटपटाहट इन्हें पुख्ता बनाती है। जीवन के धरातल पर कंधे से कंधा मिलाकर इन कविताओं में कवि कहीं न कहीं स्वयं विराजमान है।

नरेन्द्र गौड़ की पुस्तक ‘लक्की लेखक’ की समीक्षा सविता गुप्ता द्वारा प्रस्तुत की गई।उन्होंने कहा कि व्यंग्य में सच्चाई का पुट होता है। व्यंग्यकार ने समाज से जो कुछ भी पाया,इन व्यंग्यों के माध्यम से समाज को लौटाया है।अन्य विधाओं की भांति आज सटीक व्यंग्य भी समाज को आईना दिखाते हैं।वीणा अग्रवाल की पुस्तक ‘नन्ही काव्या’ की समीक्षा डॉ. घमंडी लाल अग्रवाल ने की। उन्होंने कहा कि प्रौढ़ साहित्य की नींव भी बाल साहित्य पर टिकी हुई है।

यदि आज हमारे बच्चे स्वस्थ बाल साहित्य पढ़ेंगे तो उनमें संस्कार की पूंजी स्वयमेव ही एकत्र हो जाएगी।पाठ्येत्तर सामग्री के साथ साथ ऐसी पुस्तकों का बच्चों द्वारा पढ़ा जाना समय की मांग है।

इस अवसर पर तीनों पुस्तकों के लेखकों ने अपनी रचना प्रक्रिया से जुड़े कई पहलुओं पर अपनी बात कही।

मदन साहनी ने अपने उद्बोधन व अशोक शर्मा अक्स ने अध्यक्षीय संबोधन के दौरान लेखन की सार्थकता पर विस्तृत चर्चा की।इसके साथ ही कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।