बंदना कुमारी (पटना)——“आज भी हमलोग को यहां पीने का पानी भरने के लिए सुबह सुबह नल पर लाइन लगाना पड़ता है. अगर ज़रा देर हो […]
Category: बिहार
कृषि के प्रति नई पीढ़ी का रुझान क्यों घटने लगा है ?
गीता देवी (गया)–आशा के अनुरूप इस बार के केंद्रीय बजट 2024-25 में भी कृषि और किसानों का विशेष ध्यान रखते हुए कई नई घोषणाएं की […]
स्वच्छ भारत के नक़्शे में क्यों नज़र नहीं आती स्लम बस्तियां?
ईशा कुमारी (पटना)——-देश को स्वच्छ बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों से केंद्र के स्तर पर लगातार प्रयास किये जाते रहे हैं. एक ओर जहां […]
मजबूरी में मजदूरी करते हैं बच्चे
निशा सहनी (मुजफ्फरपुर)——बिहार के मुजफ्फरपुर से 22 किमी दूर कुढ़नी प्रखंड अंतर्गत तेलिया गांव का 11 वर्षीय बैजू (नाम परिवर्तित) रोज़ सुबह अन्य बच्चों की […]
गांव तक सड़क पहुंची मगर परिवहन की सुविधा नहीं
गोल्डी कुमारी (गया)——हमारे देश में पिछले कुछ दशकों में जिन बुनियादी ढांचों पर सबसे अधिक ज़ोर दिया गया है, उसमें सड़क प्रमुख है. वर्ष 2000 […]
मशरूम की खेती बनी महिला किसानों की नयी पहचान
प्रियंका साहू (मुजफ्फरपुर)—आज मशरूम भोजन व स्वाद की दुनिया में अलग ही पहचान बना रही है. लोगों की जुबान पर मशरूम की सब्जी, खीर, अचार, नमकीन […]
स्वच्छता की ओर बढ़ता गांव
कविता कुमारी (गया) — करीब 10 वर्ष पूर्व जब केंद्र सरकार ने देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी तो किसी ने भी नहीं […]
क्यों ठहर जाता है स्लम बस्तियों में विकास का पहिया ?
ज्योति कुमारी(पटना)——- हमारे देश की एक बड़ी आबादी आज भी ऐसी है जो शहरों और महानगरों में आबाद तो है, लेकिन वहां शहर के अन्य […]
किसानों की जरूरत और पराली संकट का समाधान
फूलदेव पटेल–(मुजफ्फरपुर)—-“हम लोग बहुत मजबूर हैं, समयानुसार खेतों की जुताई-बुआई करनी पड़ती है. खेतों में सिंचाई तो स्वयं कर लेते हैं, लेकिन तैयार फसलों की […]
बिहार : औरंगाबाद में 50 प्रतिशत, गया में 52 प्रतिशत, नवादा में 41.50 प्रतिशत और जमुई में जमुई 50 प्रतिशत मतदान
पटना. लोकसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान बिहार के गया, औरंगाबाद, नवादा और जमुई लोकसभा सीट पर चुनाव कराए गए. बिहार निर्वाचन आयोग के […]
