लखनऊ (निशांत सेक्सेना) ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को रफ्तार देते हुए हाल ही में भारत सरकार ने 400 करोड़ रुपये की लागत वाला एक आर एण्ड […]
Category: मुद्दे
अब मासिक धर्म चक्र तक पर असर डाल रहा है वायु प्रदूषण। त्वरित जलवायु कार्यवाही अब नहीं तो कब ? : राखी गंगवार
सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन अमेरिका में एमोरी यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बचपन में वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने […]
कृषि एवं पशुपालन में विशेष पहचान रखने वाला सरहदी गांव मंगनाड : भारती देवी
पुंछ, जम्मू————– हर एक व्यक्ति या स्थान अपनी विशेष पहचान रखता है. चाहे वह पहचान छोटी हो या बड़ी. ऐसा कोई स्थान नहीं है जिसकी […]
सस्टेनेबिलिटी और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों की पत्रकारों में बेहतर समझ ज़रूरी
लखनऊ (निशांत सेक्सेना) जिस रफ्तार से जलवायु परिवर्तन और सस्टेनेबिलिटी जैसे मुद्दों की प्रासंगिकता बढ़ रही है और आमजन में उसके प्रति […]
साल 2030 तक सड़कों पर होंगी दस गुना इलैक्ट्रिक कारें: वर्ल्ड एनेर्जी आउटलूक 2023
लखनऊ (निशांत सेक्सेना) ऊर्जा जगत में साल 2030 तक बहुत कुछ बदलने वाला है। और यह बदलाव होगा मौजूदा नीतियों के चलते। वर्ल्ड एनर्जी […]
खेलकूद की जगह घर के कामों में उलझा दी गई किशोरियां : सिमरन सहनी
मुजफ्फरपुर———- हाल ही में संपन्न हुए एशियाई खेलों में भारत ने पहली बार मेडलों का शतक लगाते हुए नया कीर्तिमान गढ़ दिया. इस एतिहासिक […]
विंड एनेर्जी इंडस्ट्री में 2027 तक भरपूर नौकरियों की उम्मीद
लखनऊ(निशांत सेक्सेना) ग्लोबल विंड ऑर्गेनाइजेशन (जीडब्ल्यूओ) और ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (जीडब्ल्यूईसी) की एक ताजा रिपोर्ट में वर्ष 2027 तक अनुमानित पवन ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण, स्थापना, संचालन और रखरखाव […]
क्यों लड़कियों को पढ़ाने के लिए समाज गंभीर नहीं हैं ? : भारती देवी
पुंछ, जम्मू —— वर्षों बीत जाते हैं यह सुनते सुनते की किशोरियों और महिलाओं पर आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं. दुनिया में इतनी तरक्की हो […]
भीषण गर्मी से आपके बच्चे का बुढ़ापा हो सकता है ख़राब
लखनऊ (निशांत सेक्सेना) इस नए शोध की मानें तो जलवायु परिवर्तन और भीषण गर्मी आपके बच्चे का बुढ़ापा खराब कर सकती है। अगर आप […]
कोयले से अगर दुनिया बना रही दूरी तो रोज़ 100 खदानकर्मियों की बढ़ भी रही मजबूरी
लखनऊ ( निशांत सेक्सेना) कोयले से दूरी यूं तो ज़रूरी है, लेकिन उससे नजदीकी बहुतों की मजबूरी भी है। मसलन उन मजदूरों की को कोयला खदानों […]
