सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से ज़्यादा के कुछ UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, साथ ही सरकार से नए फ़्रेमवर्क का आधार बताने को कहा।
चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच इस लेवी (शुल्क) को चुनौती देने वाली एक PIL पर सुनवाई कर रही थी, जो 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है।
याचिका में व्यापारियों पर इसके संभावित असर और ज़्यादा वैल्यू वाले पेमेंट के लिए UPI के लगातार इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई है।
वकील अंजन दत्ता द्वारा दायर PIL में पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांज़ैक्शन के लिए प्रस्तावित MDR स्ट्रक्चर को चुनौती दी गई है।
इस फ़्रेमवर्क के तहत, P2P ट्रांसफ़र और ₹2,000 तक के P2M पेमेंट मुफ़्त रहेंगे, जबकि ₹2,000 से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% MDR लगेगा, जिसमें ₹75,000 या उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के लिए ज़्यादा से ज़्यादा ₹300 का चार्ज लगेगा।
इस फ़्रेमवर्क में कुछ ज़रूरी सेक्टर में ₹5 का चार्ज, कैपिटल-मार्केट पेमेंट पर 0.02% लेवी और हर महीने ₹1 लाख तक की कमाई करने वाले व्यापारियों को छूट देने का भी प्रावधान है।
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कोर्ट को बताया कि पर्सन-टू-पर्सन UPI ट्रांसफ़र मुफ़्त बने रहेंगे और लगभग 96% मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि ग्राहकों पर लागत का बोझ न डालने की बात कहने के बावजूद, यह लेवी अंततः व्यापारियों को प्रभावित कर सकती है, जिससे कीमतें, वर्किंग कैपिटल और कम मार्जिन वाले व्यवसायों की UPI पेमेंट स्वीकार करने की इच्छा प्रभावित हो सकती है।
याचिका में ₹2,000 की ट्रांज़ैक्शन लिमिट और ₹1 लाख की मासिक प्राप्ति सीमा तय करने के आधार पर भी सवाल उठाए गए, और लागत से जुड़ी स्टडी, तरीका और लागू करने योग्य सुरक्षा उपायों के न होने की ओर इशारा किया गया।
सुप्रीम कोर्ट को इस चरण में प्रस्तावित लेवी पर अंतरिम रोक लगाने का कोई आधार नहीं मिला, लेकिन उसने केंद्र से एक हलफ़नामा मांगा जिसमें नए MDR फ़्रेमवर्क को बनाने का आधार बताया गया हो।
याचिकाकर्ता की यह दलील भी रखी गई कि इस स्ट्रक्चर की वजह से ₹2,000 से कम और उससे ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन के बीच बड़ा फ़र्क आ जाता है; ₹2,001 के पेमेंट पर प्रतिशत के आधार पर चार्ज लगता है, जबकि ₹2,000 का पेमेंट मुफ़्त रहता है।
याचिका में यह सवाल भी उठाया गया कि तय सीमा से ज़्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज क्यों लगेगा, जबकि RuPay-पावर्ड डेबिट-कार्ड ट्रांज़ैक्शन पर बिना किसी मॉनेटरी लिमिट के ‘नो-चार्ज’ की सुविधा मिलती रहेगी।
सभी दलीलों पर विचार करने के बाद, कोर्ट ने केंद्र सरकार के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और सरकार को निर्देश दिया कि वह नए फ़्रेमवर्क का आधार बताते हुए एक हलफ़नामा (affidavit) दाखिल करे।
