बिहार के महाधिवक्ता की नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रश्न !

अधिवक्ता गौरव नारायण भारती : क्या कोई अधिवक्ता अधिकतम आयु सीमा 62 वर्ष के बाद भी महाधिवक्ता के पद पर नियुक्त हो सकता है!

बिहार के महाधिवक्ता (Advocate General) का पद कोई सामान्य सरकारी पद नहीं है। यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 165 के अंतर्गत स्थापित एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है।

अतः यह किसी व्यक्ति विशेष से संबंधित व्यक्तिगत प्रश्न नहीं है। यह संविधान की सर्वोच्चता तथा संवैधानिक नियुक्तियों में पारदर्शिता का प्रश्न है।

संविधान का अनुच्छेद 165(1) यह प्रावधान करता है कि किसी राज्य के महाधिवक्ता के रूप में नियुक्त व्यक्ति में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए आवश्यक संवैधानिक योग्यताएँ होनी चाहिए।

बिहार के वर्तमान महाधिवक्ता श्री एस. डी. संजय की नियुक्ति के संबंध में कुछ गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठते हैं, जिन पर बिहार सरकार को स्पष्ट रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

नियुक्ति से पूर्व अनुच्छेद 165(1) के अंतर्गत आवश्यक सभी संवैधानिक योग्यताओं का सत्यापन किस प्रकार किया गया?

क्या नियुक्त व्यक्ति की संवैधानिक पात्रता के संबंध में कोई स्वतंत्र कानूनी राय (Legal Opinion) प्राप्त की गई थी?

क्या नियुक्ति से पूर्व राज्य सरकार ने अनुच्छेद 165 और अनुच्छेद 217 की संवैधानिक व्याख्या पर समुचित विचार किया?

क्या नियुक्ति की संपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया, पात्रता सत्यापन तथा संबंधित अभिलेख उचित सार्वजनिक जांच और पारदर्शिता के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे?

संवैधानिक पद राजनीतिक अथवा व्यक्तिगत पसंद के आधार पर संचालित नहीं हो सकते। ऐसे पदों पर नियुक्तियाँ संविधान द्वारा निर्धारित योग्यताओं और प्रक्रियाओं के अनुरूप ही होनी चाहिए।

यदि किसी संवैधानिक पद पर नियुक्ति किसी अनिवार्य संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन करके की गई है, तो ऐसी नियुक्ति संवैधानिक एवं न्यायिक समीक्षा के अधीन हो सकती है।

महाधिवक्ता की नियुक्ति के लिए अपनाई गई संपूर्ण संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।

अनुच्छेद 165(1) के अंतर्गत नियुक्त व्यक्ति की पात्रता का परीक्षण किन आधारों पर किया गया, इसे स्पष्ट किया जाए।

नियुक्ति से पूर्व प्राप्त कानूनी राय, यदि कोई हो, तथा पात्रता सत्यापन से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

यदि किसी अनिवार्य संवैधानिक आवश्यकता का उल्लंघन पाया जाता है, तो मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर संविधान एवं कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए।

यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध व्यक्तिगत अभियान नहीं है।

यह संवैधानिक अनुपालन, पारदर्शिता और जवाबदेही से संबंधित विषय है।

महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। इसलिए ऐसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर नियुक्ति से संबंधित किसी भी वास्तविक संवैधानिक प्रश्न का स्पष्ट, कानूनी और पारदर्शी उत्तर दिया जाना आवश्यक है।

संविधान सर्वोपरि है।
संवैधानिक नियुक्तियों में पारदर्शिता आवश्यक है।
कानून सभी के लिए समान है!
पद चाहे कितना भी ऊँचा क्यों न हो ?

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