प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज फिर मंगल मिलन : शिक्षा मंत्री को बदलना कौन सी बड़ी बात है, थोड़ी से सुझ बेहतर परिणाम,

पेपर लीक के बारे में जो प्रधानमंत्री महोदय आज बातें कही है वही बात इससे कहने में क्या हर्ज था।

आन्दोलनकारियों की मांग हिमालय पहाड़ उठाने जैसा तो नहीं है,

धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर कोई और प्रोटफोलियो दिया जा सकता है, मंत्रिमंडल में हेराफेरी तो सत्ता पक्ष द्वारा होता रहता है।

आयोग से लेकर नीट ,नेट तक का पेपर नियमित रूप से लीक होना , गलत है, गरीब छात्र/ छात्रा को षडयंत्र के तहत मायूस करना तो गरीबों के साथ अत्याचार है।

यही फल भुगतने के लिय युवा घर – घर मोदी का जोश भरा था, बीजेपी और खासकर मोदी महोदय इस पर विचार करे और संकीर्ण वातावरण से बाहर आयें।

धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रालय बदलकर खुद जंतर मंतर पर युवा के पास जाय , देखिये, किस तरह वातावरण बदलता है।

जनकल्याणकारी शासक युवा नब्ज पकड़ कर चलता है।

बिहार यूपी ,राजस्थान , महाराष्ट्र आयोग का पेपर लीक कर करोड़ पति बन रहा है।

पेपर लीक वाले युवा कुर्सी मिलते ही जनता के साथ अभद्र‍ व्यवहार करता है।

अगर एक मोदी से युवाओ को लालू  प्रसाद , ममता बनर्जी ,अखिलेश जैसे शासक का व्यवहार और शासन मिलेगा तो फिर बीजेपी और अन्य में क्या अंतर है।

वर्तमान की स्थिति से निपटने के लिय साधारण सी बातें थी

सोनम वांगचुक और सीजेपी लीडिंग सदस्य से वार्ता कर समाप्त किया जा सकता था और अभी भी किया जा सकता है।

सोनम वांगचुक और सीजेपी का मांग मंत्री या प्रधानमंत्री बनाने की तो नहीं है।

जिस सरकार में अपने जनता के प्रति लोचकता नहीं , वह सरकार निंदनीय है।

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