• August 2, 2025

भारत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास 2025,

भारत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास 2025,

पीआईबी दिल्ली —– राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आर जीआरयू) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित भारत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास 2025, भारत के साइबर सुरक्षा परिदृश्य में एक ऐतिहासिक आयोजन के रूप में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसमें साइबर सुरक्षा पेशेवरों, नीति निर्माताओं, रक्षा कर्मियों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के नेताओं सहित 600 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

इस वर्ष के अभ्यास में औद्योगिक नियंत्रण प्रणाली (आईसीएस) सुरक्षा और एआई-संचालित साइबर खतरों जैसे प्रतिकूल हमलों और डीपफेक हेरफेर पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, साथ ही सुरक्षा संचालन केंद्र (एसओसी), एपीआई सुरक्षा, रिवर्स इंजीनियरिंग मैलवेयर विश्लेषण (आरईएमए), और डिजिटल फोरेंसिक और घटना प्रतिक्रिया (डीएफआईआर) को कवर करने वाले मुख्य मॉड्यूल भी शामिल किए गए।

इस अभ्यास के पूरक के रूप में, भारत सीआईएसओ कॉन्क्लेव और भारत साइबर सुरक्षा स्टार्टअप प्रदर्शनी ने रणनीतिक संवाद के लिए महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य किया, जिससे ज्ञान का आदान-प्रदान संभव हुआ और अत्याधुनिक नवाचारों का प्रदर्शन हुआ जो भारत के साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए तैयार हैं।

रणनीतिक अभ्यास (स्ट्रेटेक्स) खंड ने राष्ट्रीय स्तर के साइबर खतरे के अनुकरणीय परिदृश्यों के माध्यम से अंतर-एजेंसी समन्वय, संकट प्रबंधन और वास्तविक समय प्रतिक्रिया क्षमताओं का कठोर परीक्षण किया। यह घटक परिस्थितिजन्य जागरूकता को बढ़ावा देने और सामूहिक साइबर रक्षा तत्परता को बढ़ाने में सहायक रहा।

उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और सम्मानित मुख्य अतिथि श्री टी. वी. रविचंद्रन ने एक प्रभावशाली समापन भाषण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा ढाँचे में उभरते साइबर खतरे के प्रतिमानों को शामिल करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बल दिया। श्री रविचंद्रन ने तेजी से जटिल होती साइबर चुनौतियों का सामना करते हुए राष्ट्र की डिजिटल संप्रभुता की रक्षा के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता, एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और निरंतर नवाचार का आह्वान किया।

एनएससीएस के संयुक्त सचिव (साइबर) मेजर जनरल मंजीत सिंह ने अभ्यास से सीखे गए सबक का गहन विश्लेषण साझा किया, जिसमें साइबर खतरों में उभरते रुझानों और अनुकूली, लचीली सुरक्षा बनाने की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने निरंतर क्षमता निर्माण, खतरे की खुफिया जानकारी साझा करने और विरोधियों से आगे रहने के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने के महत्व पर बल दिया।

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के प्रो-कुलपति प्रोफेसर कल्पेश वंद्रा ने राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा क्षमताओं को उन्नत करने में शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नवाचार, अनुसंधान और अंतःविषय सहयोग को बढ़ावा देना भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सक्षम एक मज़बूत साइबर सुरक्षा कार्यबल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एनएससीएस के निदेशक कर्नल देबाशीष बोस ने सभी प्रतिभागियों, सहयोगी संगठनों और विशेष रूप से राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के अथक प्रयासों को इस अभ्यास की मेजबानी और समर्थन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए हार्दिक धन्यवाद दिया। उन्होंने सामूहिक समर्पण और व्यावसायिकता की प्रशंसा की जिसने इस आयोजन को एक शानदार सफलता दिलाई।

राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अभ्यास 2025 के समापन के साथ, यह आयोजन सहयोग, नवाचार और मज़बूत राष्ट्रीय तैयारियों की एक विरासत छोड़ रहा है, जो एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर डिजिटल भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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