मुंबई में इंडिया स्टील 2025 सम्‍मेलन : इस्पात उद्योग की संभावनाओं और अवसरों पर चर्चा

मुंबई में इंडिया स्टील 2025 सम्‍मेलन : इस्पात उद्योग की संभावनाओं और अवसरों पर चर्चा
PIB Delhi———– प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने  मुंबई में इंडिया स्टील 2025 सम्‍मेलन को वीडियो माध्यम से सम्‍बोधित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले दो दिनों में भारत के उभरते क्षेत्र – इस्पात उद्योग की संभावनाओं और अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में स्टील (इस्‍पात) ने मूल ढांचे की अहम भूमिका निभाई है।
 भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है, जिसमें इस्‍पात क्षेत्र इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत भारत ने वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन इस्‍पात उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
अभी प्रति व्यक्ति इस्‍पात की खपत लगभग 98 किलोग्राम है और वर्ष 2030 तक यह बढ़कर 160 किलोग्राम होने की संभावना है।

पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के आधार के कारण इस्पात उद्योग भविष्य को लेकर आत्मविश्वास से भरा हुआ है।

बेहतर मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए खदान क्षेत्रों और इस्पात इकाइयों का मानचित्रण किया जा रहा है।

1.3 ट्रिलियन डॉलर की राष्ट्रीय आधारभूत संरचना पर हम काफी आगे  हैं।

उन्होंने कहा कि शहरों को स्मार्ट शहरों में बदलने के व्‍यापक स्‍तर के प्रयास, साथ ही सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और पाइपलाइनों के विकास में अभूतपूर्व गति से इस्पात क्षेत्र में नई संभावनाएं उत्‍पन्‍न हुई हैं।

पीएम आवास योजना के तहत करोड़ों घर बनाए जा रहे हैं और जल जीवन मिशन द्वारा गांवों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे निर्मित किए जा रहे हैं।

सरकारी परियोजनाओं में केवल ‘स्‍वदेश निर्मित’ इस्पात के उपयोग :

भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे में स्‍वदेशी इस्पात की सबसे अधिक खपत हो रही है।

इस्पात उद्योग के लिए सरकार की नीतियां भारत में कई अन्य उद्योगों को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

विनिर्माण, निर्माण, मशीनरी और वाहन निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारतीय इस्‍पात उद्योग से शक्ति मिल रही है।

‘मेक इन इंडिया’ पहल को गति देने के लिए इस वर्ष के बजट में राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन आरंभ किए जाने का उल्‍लेख किया।

उन्होंने कहा कि यह मिशन छोटे, मध्यम और बड़े उद्योगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो इस्‍पात क्षेत्र के लिए नए अवसर उपलब्‍ध कराएगा।

भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत का निर्माण घरेलू स्तर पर उत्‍पादित इस्‍पात से किया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय इस्‍पात ने ऐतिहासिक चंद्रयान मिशन की सफलता में भी योगदान दिया, जो भारत की क्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक है।

प्रोत्साहन योजना-पीएलआई जैसी पहल से संभव हुआ है, जिसने उच्च श्रेणी के इस्‍पात के उत्पादन में सहायता-सहयोग के लिए हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए।

देश भर में आरंभ की जा रही मेगा-परियोजनाओं में उच्च श्रेणी के गुणवत्‍तापूर्ण इस्‍पात की बढ़ती मांग को इंगित किया।

प्रधानमंत्री ने भारत में पाइपलाइन-ग्रेड स्टील और जंग-रोधी मिश्र धातुओं की बढ़ती मांग का भी उल्‍लेख किया।

प्रधानमंत्री ने शून्य आयात लक्ष्य और शुद्ध निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत अभी 25 मिलियन टन इस्‍पात निर्यात के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है और वर्ष 2047 तक इस्‍पात उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 500 मिलियन टन करने का लक्ष्य है।

सुरक्षित कच्‍चा माल चिंता का विषय है, क्योंकि भारत अभी भी निकल, कोकिंग कोल और मैंगनीज के लिए आयात पर निर्भर है।

आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने और प्रौद्योगिकी उन्नयन पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। \

ऊर्जा-कुशल, कम उत्सर्जन और डिजिटल तौर पर उन्नत प्रौद्योगिकियों की ओर तेजी से आगे बढ़ने के महत्व का उल्‍लेख किया।

इस्पात उद्योग का भविष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वचालन, पुनर्चक्रण और उप-उत्पाद उपयोग द्वारा संवारा जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कोयले के आयात, खास तौर पर कोकिंग कोल के आयात से व्‍यय और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्‍लेख किया।

डीआरआई रूट (इस्‍पात बनाने की विधि जहां लौह अयस्‍क को सीधे कम करके स्‍पोंज आयरन या डायरेक्‍ट रिड्यूस्‍ड आयरन बनाया जाता है) जैसी प्रौद्योगिकियों की उपलब्धता का उल्‍लेख किया और इन्हें बढ़ावा देने के प्रयासों पर जोर दिया।

अप्रयुक्त नई खदानों (ग्रीनफील्‍ड खदान) के मुद्दे के समाधान को रेखांकित करते हुए  कहा कि पिछले दशक में कई अहम खनन सुधार किए गए हैं, जिससे लौह अयस्क की उपलब्धता सुगम हुई है।

श्री मोदी ने चुनौती से निपटने के लिए ग्रीनफील्ड खनन प्रयासों में तेजी लाने का आह्वान किया।

भारत अब केवल घरेलू विकास पर केंद्रित नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

इस्‍पात उत्पादन में विश्व स्तरीय मानक बनाए रखने और क्षमताओं के लगातार उन्नयन के महत्व को दोहराया।

लॉजिस्टिक्स में सुधार, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क विकसित करने और लागत न्‍यूनीकरण से भारत को वैश्विक स्टील हब बनने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्‍लेख किया कि इंडिया स्टील 2025 सम्‍मेलन क्षमताओं को बढ़ाने और विचारों को कार्रवाई योग्य समाधान में बदलने का मंच प्रदान करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए प्रत्‍यास्‍थी, परिवर्तनकारी और इस्‍पात-सुदृढ़ भारत बनाने के सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

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