- July 17, 2018
मंत्रिपरिषद की बैठक–4 एजेंडों पर मुहर — तेजाब हमला और बलात्कार पीडिता को 7 लाख रु0
पटना ———– संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय के विषेष सचिव श्री उपेन्द्र नाथ पाण्डेय ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने 4 एजेंडों पर मुहर लगाई हैं। भवन निर्माण विभाग के अन्तर्गत संविदा के आधार पर भवन निर्माण विभाग के अधीन नियोजित कुल 09 (नौ) कनीय अभियंता (असैनिक) का अगले एक वर्ष दिनांक 01.07.2018 से 30.06.2019 तक पुनर्नियोजन किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई।
स्वास्थ्य विभाग के अन्तर्गत डा० रेहान अशरफ तत्कालीन चिकित्सा पदाधिकारी कुष्ठ नियंत्रण इकाई जहानाबाद को एम०एस०डी० कोलकता से अनियमित दवा क्रय संबंधी वित्तीय अनियमितता के कारण प्रमाणित आरोप में बिहार सेवा संहिता के नियम-76 के तहत सेवा से बर्खास्त करने की स्वीकृति प्रदान की गई।
उन्होंने बताया कि नगर विकास एवं आवास विभाग के तहत जल संसाधन विभाग के द्वारा संविदा पर नियोजित कर उपलब्ध कराये गये कनीय अभियंताओं में से सम्प्रति कार्यरत 40 (चालीस) कनीय अभियंताओं के कार्यकलाप पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं होने के फलस्वरूप उनकी सेवा अवधि संलग्न अनुलग्नक-1 में अंकित तिथि के अनुसार 1 (एक) वर्ष के लिए प्रतिमाह रू० 27000 मानदेय या पारिश्रमिक पुनरीक्षण समिति द्वारा समय-समय पर पुनरीक्षित पारिश्रमिक पर विस्तारित किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। विधि विभाग के अन्तर्गत बिहार पीड़ित प्रतिकर (संशोधन) स्कीम, 2018 की स्वीकृति दी गई।
इस प्रसंग में श्री पांडेय ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 11 फरवरी, 2016 को पारित न्यायादेष के आलोक में गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उक्त विषयक संषोधित प्रतिकर अधिनियम जुलाई, 2016 से लागू था। उसी दिषा निर्देष में बिहार में पूर्व से लागू पीड़ित प्रतिकर योजना 2014 में संषोधन अनिवार्य था जिसकी मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दी है।
तदनुसार तेजाब हमला, बलात्कार पीडिताओं को पूर्व में जो 3 लाख मुआवजा मिलता था उसे 7 लाख रु0 कर दिया गया है।
14 वर्ष से कम आयु रहने पर मुआवजा राषि में 50 % की वृद्धि की जाएगी। लड़की या महिला की स्थिति में यदि आॅख की रोषनी 80 % से अधिक चली जाए,स्थायी रूप से चेहरा विकृत हो जाए तो मुआवजा योजना लागू होगा जो जिला अपराध क्षतिकर बोर्ड के प्रतिवेदन के आधार पर किया जाएगा। इस राषि के लिए जिलास्तर पर जिला पीड़ित प्रतिकर निधि गठित होगी। इसी निधि से पीड़िताओं को सबसे पहले आवष्यक प्राथमिक उपचार की भी व्यवस्था की जाएगी तथा यदि मुआवजा राषि एकमुष्त नहीं दी जा सके तो प्रतिमाह अधिकतम 10 हजार रु0 तक पीड़िता को आजीवन या जब तक आवष्यक हो तबतक दिया जाता रहेगा जिसका अंतिम फैसला जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा लिया जाएगा।