43 वर्षों की मेहनत या पागलपन — क्या भारत को नोबेल पुरस्कार दिलाएगा ?

43 वर्षों की मेहनत या पागलपन — क्या भारत को नोबेल पुरस्कार दिलाएगा ?

अजय शर्मा ने न्यूटन के 338 साल पुराने तीसरे नियम में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मान्यता मिल चुकी है।

प्रोफेसर डॉ अजय शर्मा

उनके शोध Elsevier (Oxford) के Science Talks और Physics Education (Indian Association of Physics Teachers  द्वारा  प्रकाशित,  परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा प्रायोजित) में प्रकाशित हो चुके हैं।

दोनों शोध-पत्र ऑनलाइन निशुल्क उपलब्ध हैं:

https://physedn.in/jpe/article/view/16/12
                         

बचपन से शुरुआत :- 

19 वर्ष की उम्र में, बी.एससी. के छात्र रहते हुए, अजय शर्मा ने भौतिकी के नियमों में संशोधन की बात ठाई। बी.एससी. और एम.एससी. प्रथम श्रेणी में पास की, पर शोध की लगन इतनी थी कि पीएच.डी. को महत्व नहीं दिया। उन्होंने पहले डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में, फिर हिमाचल में अध्यापन कार्य किया।
                                             प्रथम प्रोत्साहन  संघर्ष
नोबेल विजेता प्रो. अब्दुस सलाम ने उनके पत्रों का उत्तर दिया, लेकिन शेष दुनिया से सहयोग नहीं मिला। 2000 तक 20 शोधपत्र प्रकाशित हुए, फिर भी उपहास और अस्वीकृति झेलनी पड़ी। मानसिक तनाव से गुज़रने के बाद IGMC शिमला से उपचार लेकर उन्होंने दोबारा शोध शुरू किया।

विदेशी आमंत्रण और आत्मविश्वास

यूरोप व अमेरिका से सम्मेलनों के निमंत्रण मिलने लगे। हिमाचल सरकार ने उन्हें एक बार ₹20,000 व विज्ञान विभाग ने ₹9,000 की सहायता दी। इससे आत्मविश्वास बढ़ा और शोध पत्रों का दुरुपयोग रुक गया। उन्होंने कुछ पुस्तकें भी लिखीं, पर प्रकाशकों ने रुचि नहीं दिखाई।
36 वर्षों बाद परिवर्तन (2018) :- 
2018 में  वॉशिंगटन में American Association of Physics Teachers के सम्मेलन में उनके तीन शोध-पत्रों को स्वीकृति मिली। कोई सहायता न मिलने पर उन्होंने GPF से खर्च जुटाया।

प्रस्तुति के बाद एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने कहा:

“यदि आप प्रयोगों से न्यूटन के नियम की खामी साबित कर दें, तो भारत नोबेल का हकदार होगा।”

इसने अजय को इसी विषय पर केंद्रित कर दिया, जो आगे निर्णायक साबित हुआ।

राष्ट्रीय प्रयोगशाला की सराहना
2019 में NPL, दिल्ली के वैज्ञानिकों ने उनके काम की सराहना की और प्रोजेक्ट प्रस्ताव देने को कहा, पर सेवानिवृत्ति के कारण और लैब न होने से यह संभव न हो सका।
सेवानिवृत्ति और दोबारा मान्यता (2024–25)
मार्च 2021 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे शोध में लगे रहे। जून 2024 में Science Talks  में शोध प्रकाशित हुआ और अगस्त 2025 में Physics Education  में विस्तृत रूप से प्रकाशित हुआ .
न्यूटन के नियम की खामी :- 
न्यूटन का तीसरा नियम वस्तु के आकार, संरचना और लक्ष्य की भौतिक विशेषताओं की अनदेखी करता है।
जब विभिन्न आकार की वस्तुएँ गिरती हैं, तो उनकी प्रतिक्रिया दिशा व ऊँचाई भिन्न होती है, जबकि भार और सामग्री समान होती है। इससे साबित होता है कि

प्रतिक्रिया = – Q × क्रिया,
जहाँ Q वस्तु  के आकार, संरचना और टारगेट के गुण दर्शाता है।

प्रयोगसमस्या  अपील :- इस सिद्धांत की पुष्टि के लिए ₹15–20 लाख  के खर्च वाले प्रयोग आवश्यक हैं।

पर अजय शर्मा अब सेवानिवृत्त हैं, उनके पास न नौकरी है, न प्रयोगशाला वर्तमान में वे फागू (हिमाचल) में बेटे के साथ होम-स्टे बना रहे हैं।

इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मू और मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से प्रयोग हेतु सहयोग की प्रार्थना की है।

यदि यह प्रयोग सफल होते हैं, तो भारत वैज्ञानिक जगत में इतिहास रच सकता है — और नोबेल पुरस्कार का वास्तविक दावेदार बन सकता है।

Ajay Sharma
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Former Lecturer, Physics DAV College Chandigarh &
Assistant Director (Education) Shimla

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Book (forthcoming)

Newton’s Laws of Motion in the 21st Century 

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