योग और पर्यावरण — रमेश गोयल

योग और पर्यावरण — रमेश  गोयल

पतंजली योगपीठ के तत्वावधान में नगर परिषद् , रामा कल्ब व अंजनी हस्पताल के सहयोग से 28 मार्च 2017 प्रथम दिवस सम्वतसर 2074 को शुभारम्भ 9 दिवसीय योग षिविर के पांचवें दिन ‘योग एवं पर्यावरण‘ पर बोलते हुए भारत विकास परिषद् के राष्ट्रीय प्रभारी पर्यावरण एवं जल संक्षरण रमेश गोयल ने साधकों को योग का महत्व बताया कि कैसे निरन्तर योग प्राणायाम के माध्यम से स्वस्थ रह सकते हैं।1

“पहला सुख निरोगी काया” को ध्यान में रखते हुए हर व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन कुछ समय अपने लिए खर्च करना चाहिए। ऋषि पतंजलि द्वारा बताए गए योग को बाबा रामदेव द्वारा जन जन तक पहुंचाने तथा प्रधान मन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा योग के महत्व को पूरे विष्व में स्वीकृति दिलाने तथा 21 जून को विश्व योग दिवस कराने के लिए उन्होंने दोनो का आभार व्यक्त किया और बधाई दी

पर्यावरणविद् श्री रमेष गोयल ने स्वस्थ रहने के लिए पर्यावरण संरक्षण को अनिवार्य बताते हुए अपील कि की प्रदूषण न फैलायें कूड़ा कर्कट खुल्ले में न डालें, धुआं न करें, जल व उर्जा का संरक्षण करें, टुंटी खुल्ली न छोड़ें, जल बर्बाद न करें तथा बिजली बेकार न जलायें।

उन्होंने मार्च के अन्तिम सप्ताह में पारा 40 डिग्री के पार जाने पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हम प्राकृतिक संसाधनों के प्रति अपने कर्तव्य को समझें। पौधारोपण करें और वृक्ष बनने तक उनकी देखभाल करें ।

जल चालीसा के रचियता व पर्यावरण एवं जल संक्षरण को समर्पित श्री गोयल ने लकड़ी से बनी वस्तुएं व कागज का कम से कम प्रयोग पर भी चर्चा की तथा स्वस्थ रहने की कामना के साथ पर्यावरण व जल संरक्षण की पुनः अपील की।

पतंजली योगपीठ के शिक्षक सर्व श्री इन्द्रराज बिष्नोई, सुरेष तायल, विरेन्द्र नागपाल, विनोद जी, नरेन्द्र जी, बहिन इन्दा्रवती, नगरपरिशद् ईओ अतर सिंह सहित सैंकड़ो लोग इस अवसर पर उपस्थित थे।

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